Imam Ahmad : 5179
حَدَّثَنَا بَهْزٌ وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا هَمَّامٌ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ قَالَ عَفَّانُ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ مُحْرِزٍ قَالَ كُنْتُ آخِذًا بِيَدِ ابْنِ عُمَرَ إِذْ عَرَضَ لَهُ رَجُلٌ فَقَالَ كَيْفَ سَمِعْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ فِي النَّجْوَى يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يُدْنِي الْمُؤْمِنَ فَيَضَعُ عَلَيْهِ كَنَفَهُ وَيَسْتُرُهُ مِنْ النَّاسِ وَيُقَرِّرُهُ بِذُنُوبِهِ وَيَقُولُ لَهُ أَتَعْرِفُ ذَنْبَ كَذَا أَتَعْرِفُ ذَنْبَ كَذَا أَتَعْرِفُ ذَنْبَ كَذَا حَتَّى إِذَا قَرَّرَهُ بِذُنُوبِهِ وَرَأَى فِي نَفْسِهِ أَنَّهُ قَدْ هَلَكَ قَالَ فَإِنِّي قَدْ سَتَرْتُهَا عَلَيْكَ فِي الدُّنْيَا وَإِنِّي أَغْفِرُهَا لَكَ الْيَوْمَ ثُمَّ يُعْطَى كِتَابَ حَسَنَاتِهِ وَأَمَّا الْكُفَّارُ وَالْمُنَافِقُونَ فَيَقُولُ الْأَشْهَادُ { هَؤُلَاءِ الَّذِينَ كَذَبُوا عَلَى رَبِّهِمْ أَلَا لَعْنَةُ اللَّهِ عَلَى الظَّالِمِينَ }
हमसे कहिन हैं [बहज़] अऊर [अफ्फान] हमसे कहिन हैं [हम्मम] हमसे कहिन हैं [कतादाह] [शफवान बिन मुहरिज़] से [अफ्फान] कहिन, उ कहिन: मैं एक बार [इब्न उमर] का हाथ पकड़ै चाहत रहेंव लेकिन अचानक एक आदमी ओनका रोक लिहिस अऊर कहिस: आपने रसुलुल्लाह सल्लाह वल्लाह से फुसफुसाहट के बारे मा का सुना फैसला? फिर उ जवाब दिहिन: हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'अल्लाह ताअला एक मुमिन के पास गें फिर उ ओनके ऊपर आपन रक्षा रखिन अऊर ओनका लोगन से ढँकि दिहिन, अऊर ओनका आपन पापन कबूल करै का आमंत्रित किहिन, अऊर उ ओसे कहिन, का तुम ई पाप का जानत हौ?, का तुम ई पाप का जानत हौ? ' जब तक उ आपन पापन कबूल नाहीं किहिन अऊर देखिन कि उ विनाश मा होइहैं, अल्लाह कहिन: 'अब हम तोहरे लिए ई दुनिया मा ओनका ढक दिहे हई अऊर वाकई आज हम तोहरे लिए ओनका माफ कइ दिहे हई'। फिर उ अपने अच्छा कामन का एक अभिलेख दिहिन। रही बात काफिरन औ पाखंडियन के तौ गवाह कहिहैं- 'इहै लोग हैं जे अपने प्रभु के खिलाफ झूठ बोले हैं'। याद रखौ, अल्लाह का अभिशाप गलत काम करै वालेन पर पड़त है।