इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 5129

حَدَّثَنَا حَسَنُ بْنُ مُوسَى قَالَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا عُمَارَةُ بْنُ غَزِيَّةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ رَاشِدٍ قَالَ خَرَجْنَا حُجَّاجًا عَشَرَةً مِنْ أَهْلِ الشَّأَمِ حَتَّى أَتَيْنَا مَكَّةَ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ قَالَ فَأَتَيْنَاهُ فَخَرَجَ إِلَيْنَا يَعْنِي ابْنَ عُمَرَ فَقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَنْ حَالَتْ شَفَاعَتُهُ دُونَ حَدٍّ مِنْ حُدُودِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَقَدْ ضَادَّ اللَّهَ فِي أَمْرِهِ وَمَنْ مَاتَ وَعَلَيْهِ دَيْنٌ فَلَيْسَ بِالدِّينَارِ وَلَا بِالدِّرْهَمِ وَلَكِنَّهَا الْحَسَنَاتُ وَالسَّيِّئَاتُ وَمَنْ خَاصَمَ فِي بَاطِلٍ وَهُوَ يَعْلَمُهُ لَمْ يَزَلْ فِي سَخَطِ اللَّهِ حَتَّى يَنْزِعَ وَمَنْ قَالَ فِي مُؤْمِنٍ مَا لَيْسَ فِيهِ أَسْكَنَهُ اللَّهُ رَدْغَةَ الْخَبَالِ حَتَّى يَخْرُجَ مِمَّا قَالَ

उ हमसे कहिन हैं [हसन बिन मूसा] उ कहिन, उ हमसे कहिन हैं [जुहैर] हमसे [उमरह बिन गाजिया] [यह्या बिन रसीद] से कहिन हैं उ कहिन: हम एक बार सीरिया के धरती से दस तीर्थयात्रियन के साथे मक्का पहुँचे तक रवाना भए, फिर उ एक हदीस का जिक्र किहिन। उ कहिन: फिर हम [इब्न उमर] के पास आए अऊर उ हमसे भी मिले अऊर कहिन: हम एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'जेकर शौफ्तार - ओकर मदद - अल्लाह अज्जा वजल्ला के कानून के कार्यान्वयन से रोकत है, उ वाकई अल्लाह के आज्ञा के खिलाफ चला गा है। अऊर जे भी कर्ज रखत हुए मर जात है, ओकर जगह भविष्य मा न केवल दीनार या दिरहम से बल्कि अच्छा अऊर बुरा से बदल दीन जाई। अऊर जे बुराई के बारे मा जानत हुए भी बुराई से दुश्मनी करत है, उ हमेशा अल्लाह तआला के कोप मा रही जब तक कि उ बुराई का हटा न देई। अऊर जे कोई भी एक मुमिन से उ बात कहत है जवन ओकरे मा नाहीं है - ओका बदनाम करत है - तब अल्लाह ओका नरक के आग के कीचड़ मा डाल देई जब तक कि उ आपन बात से बाहर न निकल जाय'।