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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 4883

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةَ سَمِعْتُ أَبَا إِسْحَاقَ سَمِعْتُ رَجُلًا مِنْ أَهْلِ نَجْرَانَ قَالَ سَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ قُلْتُ إِنَّمَا أَسْأَلُكَ عَنْ شَيْئَيْنِ عَنْ السَّلَمِ فِي النَّخْلِ وَعَنْ الزَّبِيبِ وَالتَّمْرِ فَقَالَ أُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِرَجُلٍ نَشْوَانَ قَدْ شَرِبَ زَبِيبًا وَتَمْرًا قَالَ فَجَلَدَهُ الْحَدَّ وَنَهَى أَنْ يُخْلَطَا قَالَ وَأَسْلَمَ رَجُلٌ فِي نَخْلِ رَجُلٍ فَلَمْ يَحْمِلْ نَخْلُهُ قَالَ فَأَتَاهُ يَطْلُبُهُ قَالَ فَأَبَى أَنْ يُعْطِيَهُ قَالَ فَأَتَيَا النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَحَمَلَتْ نَخْلُكَ قَالَ لَا قَالَ فَبِمَ تَأْكُلُ مَالَهُ قَالَ فَأَمَرَهُ فَرَدَّ عَلَيْهِ وَنَهَى عَنْ السَّلَمِ فِي النَّخْلِ حَتَّى يَبْدُوَ صَلَاحُهُ

हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे कहिस है [स्यूबाह]; हम [अबू इशाक] का सुनेन; हम [नजरान के एक पुरुष निवासी] का कहत सुने रहेन; हम [इब्नू उमर] से पूछेन, हम पूछेन; सचमुच मैं तोहसे दुइ बातन के बारे मा पूछत हउँ। का तुम हमसे कहे हौ कि 'सच मा मैं तुमसे दुइ चीजन के बारे मा पूछत हउँ, खजूर पर अभिवादन अऊर शराब अऊर खजूर के मिलावै के बारे मा? ' तब इब्न उमर ने जवाब दिया, 'एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास एक व्यक्ति के साथ भेंट कीन गा रहा, जे नशा मा रहा काहे से कि उ अंगूर अऊर खजूर का मिश्रण पिया रहा।' इब्न उमर जारी रखिन, 'फिर उ सजा के रूप मा ओनका कोड़ा मारिन, उ ओनका दुइनौ का मिलावै से भी मना किहिन -एक स्वाद मा-'। इब्न उमर ने आगे कहा, 'एक आदमी भी रहा, जे खजूर पर सलाम करत रहा, लेकिन खजूर अबहीं खपत के लायक नाहीं रहा। तब ऊ मनई - जे ओका रुपिया दिहे रहे - रुपिया वापस माँगिन, लेकिन ऊ मनई देय नाहीं चाहत रहा।' इब्न उमर ने आगे कहा, 'फिर उ दुइनौ पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पास आए, पैगम्बर ने तब पूछा: 'का तोहरे खजूर पक गए हैं?' ऊ मनई जवाब दिहिस, 'अभी नाहीं'। ऊ फिर पूछिस- 'फिर ओकर धन काहे खायेव?' इब्न उमर कहिन, 'फिर उ ओनका पैसा वापस करै का आदेश दिहिन, अऊर उ खजूरन का तब तक नमस्कार करै से भी मना किहिन जब तक कि उ खपत के लायक नाइ दिखाई देत हैं'।