Imam Bukhari : 5459
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ يَقُولُ مَنْ ضَفَّرَ فَلْيَحْلِقْ وَلَا تَشَبَّهُوا بِالتَّلْبِيدِ وَكَانَ ابْنُ عُمَرَ يَقُولُلَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُلَبِّدًا
हमसे कहिस है [अबू अल यामन] हमसे [शुआइब] [अज जुहरी] से कहिस है, उ कहिन; मोका [सलीम बिन अब्दुल्ला] सूचित किहिन है कि [अब्दुल्ला बिन उमर] कहिन; उमर रदलियाल्लाहू अन्हू को कहते सुना; 'जे आपन बाल लटकावत है, ओका मुंडवावै का चाही - हज के समय - अऊर अइसन न होय का चाही जे आपन बाल बाँधत है - घोड़ा के पूंछ मा -, जबकि इब्न उमर कहिन; 'वास्तव मा, हम एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अपने बालन का चोटी मा बाँधत देखेन।'