इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 4125

حَدَّثَنَا أَبُو قَطَنٍ عَنْ الْمَسْعُودِيِّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ الْأَقْمَرِ عَنْ أَبِي الْأَحْوَصِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَلْقَى اللَّهَ غَدًا مُسْلِمًا فَلْيُحَافِظْ عَلَى هَؤُلَاءِ الصَّلَوَاتِ الْخَمْسِ حَيْثُ يُنَادَى بِهِنَّ فَإِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ شَرَعَ سُنَنَ الْهُدَى لِنَبِيِّهِ وَإِنَّهُنَّ مِنْ سُنَنِ الْهُدَى وَإِنِّي لَا أَحْسِبُ مِنْكُمْ أَحَدًا إِلَّا لَهُ مَسْجِدٌ يُصَلِّي فِيهِ فِي بَيْتِهِ فَلَوْ صَلَّيْتُمْ فِي بُيُوتِكُمْ وَتَرَكْتُمْ مَسَاجِدَكُمْ لَتَرَكْتُمْ سُنَّةَ نَبِيِّكُمْ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَلَوْ تَرَكْتُمْ سُنَّةَ نَبِيِّكُمْ لَضَلَلْتُمْ

हमका [अबू कथान] द्वारा [अल मस'उदी] से [अली बिन अल अकमर] से [अबू अल अह्वाश] से [अब्दुल्ला] से बतावा गा है कि उ कहिन, 'जे भी एक मुसलमान के रूप मा कल अल्लाह से मिले मा खुश है, ओका ओनका निभावै के लिए बोलावा जाय पर सब पांच दैनिक नमाज का पालन करै का चाही। दरअसल, अल्लाह अज्जा वजल्ला ने अपने पैगम्बर के लिए हिदायत के सुन्नत स्थापित किहिन हैं, अऊर उ सब हिदायत के सुन्नत हैं। अऊर हमका नाहीं लागत कि तुममें से एक के पास जब तक घर मा नमाज के लिए मस्जिद न हो, अगर तुम घर मा नमाज पढ़त हौ अऊर आपन मस्जिद छोड़ देत हौ, तौ एकर मतलब है कि तुम अपने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सुन्नत का त्याग कर दिहिन हौ। अऊर अगर तुम अपने पैगम्बर के सुन्नत का त्याग करब, तौ तुम निश्चित रूप से भटक जाब'।