Imam Ahmad : 3753
حَدَّثَنَا رَوْحٌ وَعَفَّانُ قَالَا حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ قَالَ عَفَّانُ أَخْبَرَنَا عَطَاءُ بْنُ السَّائِبِ عَنِ مُرَّةَ الْهَمْدَانِيِّ عَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ عَجِبَ رَبُّنَا عَزَّ وَجَلَّ مِنْ رَجُلَيْنِ رَجُلٍ ثَارَ عَنْ وِطَائِهِ وَلِحَافِهِ مِنْ بَيْنِ أَهْلِهِ وَحَيِّهِ إِلَى صَلَاتِهِ فَيَقُولُ رَبُّنَا أَيَا مَلَائِكَتِي انْظُرُوا إِلَى عَبْدِي ثَارَ مِنْ فِرَاشِهِ وَوِطَائِهِ وَمِنْ بَيْنِ حَيِّهِ وَأَهْلِهِ إِلَى صَلَاتِهِ رَغْبَةً فِيمَا عِنْدِي وَشَفَقَةً مِمَّا عِنْدِي وَرَجُلٍ غَزَا فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فَانْهَزَمُوا فَعَلِمَ مَا عَلَيْهِ مِنْ الْفِرَارِ وَمَا لَهُ فِي الرُّجُوعِ فَرَجَعَ حَتَّى أُهَرِيقَ دَمُهُ رَغْبَةً فِيمَا عِنْدِي وَشَفَقَةً مِمَّا عِنْدِي فَيَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لِمَلَائِكَتِهِ انْظُرُوا إِلَى عَبْدِي رَجَعَ رَغْبَةً فِيمَا عِنْدِي وَرَهْبَةً مِمَّا عِنْدِي حَتَّى أُهَرِيقَ دَمُهُ
हमसे [रौह] अऊर ['अफ्फान] दुइनौ कहिन; हमसे [हम्मद बिन सलामा] कहिन हैं, 'अफ्फान कहिन; हमका [अथा बिन अस साईब] [मुर्रा अल हमदानी] से [इब्नू मसूद] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से सूचित किहिन हैं, उ कहिन: 'हमरे रब्ब अज्जा व जल्ला दुइ मनई से चकित रहे, एक मनई जे आपन बिस्तर अऊर कंबल अपने परिवार अऊर सोवै के बीच छोड़ के नमाज पढ़ै के लिए छोड़ दिहिस, तब हमार प्रभु कहिन: हे मेरे स्वर्गदूत देखौ, जे मोर सेवकन का चटाई अऊर कंबल छोड़ दिहिस: नींद अऊर अपने परिवार के बीच प्रार्थना करै के लिए काहे से कि उ लोग मुझसे इनाम के आशा करत हैं अऊर मुझसे सजा से डरत हैं। अऊर एक मनई जवन अल्लाह अज्जा वा जल्ला के राह मा लड़त है अऊर ओकर सेना हार पावत है, ऊ जानत है कि युद्ध के मैदान से भागै के पाप है अऊर अगर ऊ लौटत है -लड़े- लड़ै के लिए-, तौ ऊ तब तक लड़ै के लिए लौटत है जब तक कि ओकर खून बहा न जाय काहे से कि ऊ मुझसे प्रतिशोध के उम्मीद करत है अऊर मुझसे सजा से डरत है, तब अल्लाह वल्लाह अपने सेवकन से कहत है: ऊ युद्ध मा लौटत है काहे से कि ऊ मोसे प्रतिशोध के आशा करत है अऊर जब तक ओकर खून न बहा जाय तब तक मोसे सजा से डरत है'।