Doa sujud - 8: ALLAHUMMAJ'AL FII QALBII NUURAN ...
Imam Ahmad : 2436
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ عَنْ كُرَيْبٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ بِتُّ فِي بَيْتِ خَالَتِي مَيْمُونَةَ فَرَقَبْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَيْفَ يُصَلِّي فَقَامَ فَبَالَ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ وَكَفَّيْهِ ثُمَّ نَامَ ثُمَّ قَامَ فَعَمَدَ إِلَى الْقِرْبَةِ فَأَطْلَقَ شِنَاقَهَا ثُمَّ صَبَّ فِي الْجَفْنَةِ أَوْ الْقَصْعَةِ وَأَكَبَّ يَدَهُ عَلَيْهَا ثُمَّ تَوَضَّأَ وُضُوءًا حَسَنًا بَيْنَ الْوُضُوءَيْنِ ثُمَّ قَامَ يُصَلِّي فَجِئْتُ فَقُمْتُ عَنْ يَسَارِهِ فَأَخَذَنِي فَأَقَامَنِي عَنْ يَمِينِهِ فَتَكَامَلَتْ صَلَاةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثَلَاثَ عَشْرَةَ رَكْعَةً قَالَ ثُمَّ نَامَ حَتَّى نَفَخَ وَكُنَّا نَعْرِفُهُ إِذَا نَامَ بِنَفْخِهِ ثُمَّ خَرَجَ إِلَى الصَّلَاةِ فَصَلَّى وَجَعَلَ يَقُولُ فِي صَلَاتِهِ أَوْ فِي سُجُودِهِ اللَّهُمَّ اجْعَلْ فِي قَلْبِي نُورًا وَفِي سَمْعِي نُورًا وَفِي بَصَرِي نُورًا وَعَنْ يَمِينِي نُورًا وَعَنْ يَسَارِي نُورًا وَأَمَامِي نُورًا وَخَلْفِي نُورًا وَفَوْقِي نُورًا وَتَحْتِي نُورًا وَاجْعَلْنِي نُورًا قَالَ شُعْبَةُ أَوْ قَالَ اجْعَلْ لِي نَوَرًا قَالَ و حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ عَنْ كُرَيْبٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّهُ نَامَ مُضْطَجِعًا
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे [स्यूबाह] [सलामा बिन कुहैल] से [कुरैब] से [इब्न अब्बास] से कहिन हैं, उ कहिन; 'मैं एक बार अपनी चाची मैमुनाह के घरे रहा, ताकि मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नमाज पढ़ै के प्रक्रिया का निरीक्षण कर सकित। ऊ पेशाब किहिस, फिर आपन मुँह अऊर हाथ धोइस अऊर फिर से सो गवा। फिर उठि कै पानी के पास गये औ रस्सी खोलिन, ऊ बर्तन या ट्रे मा डारि दिहिन, फिर हाथ डारिन औ दुइ वजू के बीच मा ठीक से वजू करिन- न बहुत कम न ज्यादा-, यहिके बाद नमाज पढ़िन। मैं तुरतै आके उनके बाईं ओर खड़ा होइ गयेंव, पै वा मोहिका पकड़ के अपने दाईं ओर खड़ा कइ दिहिस। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने तेरह रकात पढ़ी। उ इब्न अब्बास कहिन; 'फिर ऊ सोवत रहा जब तक ऊ खर्राटा न लेत रहा, और हम जानत रहे कि ऊकी नींद ओकरे खर्राटे से है, फिर ऊ नमाज पढ़ै निकलत रहा, फिर ऊ नमाज पढ़त रहा, और अपनी नमाज या सजदा मा पढ़त रहा: 'अल्लाहुम्माजल फी क़ालबी नूरन वा फी साम'ई नूरन वा फी बशरी नूरन नुरन वानिअनवानिनुरानुमानु' NURAN WA AMAMI NURAN WA KHALFI NURAN WA FOUQI NURAN WA TAHTI NURAN WAJ'ALNI NURAN - हे अल्लाह मेरे दिल में रोशनी बनाओ, मेरे सुनने में रोशनी, मेरे दृष्टि में रोशनी, मेरे दाईं ओर रोशनी, मेरे बाईं ओर रोशनी, मेरे सामने रोशनी, मेरे पीछे रोशनी, मेरे नीचे रोशनी, और मुझसे रोशनी बनाओ'। शुबा कहिस; या उ कहिन; 'इज'ल ली नूरन -मेरे लिए एक रोशनी बनो-'। तब उ कहिन; अऊर [अमरू बिन दीनार] का [कुरैब] से [इब्न अब्बास] से बताइस है; कि ऊ लेट के सोवा रहा।