Imam Ahmad : 2048
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ جَابِرٍ عَنِ الشَّعْبِيِّ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا احْتَجَمَ احْتَجَمَ فِي الْأَخْدَعَيْنِ قَالَ فَدَعَا غُلَامًا لِبَنِي بَيَاضَةَ فَحَجَمَهُ وَأَعْطَى الْحَجَّامَ أَجْرَهُ مُدًّا وَنِصْفًا قَالَ وَكَلَّمَ مَوَالِيَهُ فَحَطُّوا عَنْهُ نِصْفَ مُدٍّ وَكَانَ عَلَيْهِ مُدَّانِ
हमसे [मुहम्मद बिन जाफर] बताइस है [स्यूबाह] से [जाबिर] से [अश शबी] से [इब्न अब्बास] से; कि अगर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कप किहिन, तौ उ गर्दन के किनारे के दुइनौ नस का कप करिन। उ -इब्न अब्बास- कहिन; 'उ बानी बयादला से संबंधित एक गुलाम का बोलाइस, फिर - गुलाम - ओका कप लगाइस अऊर तांबा का डेढ़ कीचड़ दिहिस'। उ -इब्न अब्बास- कहिन; 'दास अपने मालिकन से बात किहिस कि उइ ओकर मजदूरी आधा कीचड़ कम कइ दिहिन, भले ही पहिले ओका दुइ कीचड़ मिला रहा'।