Imam Ahmad : 2011
حَدَّثَنَا يَزِيدُ أَخْبَرَنَا ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ خَالِدٍ عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ ذُؤَيْبٍ عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَسَارٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَ عَلَيْهِمْ وَهُمْ جُلُوسٌ فَقَالَ أَلَا أُحَدِّثُكُمْ بِخَيْرِ النَّاسِ مَنْزِلَةً فَقَالُوا بَلَى يَا رَسُولَ اللَّهِ فَقَالَ رَجُلٌ مُمْسِكٌ بِعِنَانِ فَرَسِهِ فِي سَبِيلِ اللَّهِ حَتَّى يَمُوتَ أَوْ يُقْتَلَ أَفَأُخْبِرُكُمْ بِالَّذِي يَلِيهِ قَالُوا نَعَمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ امْرُؤٌ مُعْتَزِلٌ فِي شِعْبٍ يُقِيمُ الصَّلَاةَ وَيُؤْتِي الزَّكَاةَ وَيَعْتَزِلُ شُرُورَ النَّاسِ أَفَأُخْبِرُكُمْ بِشَرِّ النَّاسِ مَنْزِلَةً قَالُوا نَعَمْ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ الَّذِي يُسْأَلُ بِاللَّهِ وَلَا يُعْطِي بِهِ
हमसे कहिस है [यजीद] हमसे [इब्न अबू दज़ी`ब] से [सैद बिन खालिद] से [इस्माइल बिन अब्दुर्रहमान बिन डज़ू`एब] से ['अथो` बिन यासर] से [इब्न अब्बास] से कहिस है; कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैठे दोस्तों के पास बाहर आए। उ कहिन: 'का हम तोहका सबसे अच्छा मनई बताई जहाँ उ रहत है?' उइ जवाब दिहिन; 'हाँ, हे अल्लाह के रसूल'। उ कहिन: 'एक मनई अल्लाह के राह मा अपने घोड़ा के बागडोर तब तक पकड़े रहत है जब तक कि उ मर न जाय या मार न जाय। का हम तोहका बताई कि अगला पद केकरे पास है?' उइ जवाब दिहिन; 'हाँ, हे अल्लाह के रसूल'। उ कहिन: 'जो मनई घाटी मा खुद का अलग-थलग करत है, उ नमाज पढ़त अऊर जकात देत रहत है अऊर खुद का मानवीय बुराई से अलग करत है। का हम तोहका रहय के सबसे खराब जगह बताई?' उइ जवाब दिहिन; 'हाँ, हे अल्लाह के रसूल'। उ कहिन: 'वह उ व्यक्ति है जेसे अल्लाह का नाम लेवे के लिए कहा जात है लेकिन उ नाहीं देत है'।