Imam Ahmad : 1964
حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَحْيَى بْنِ عُبَيْدٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يُنْبَذُ لَهُ لَيْلَةَ الْخَمِيسِ فَيَشْرَبُهُ يَوْمَ الْخَمِيسِ وَيَوْمَ الْجُمُعَةِ قَالَ وَأُرَاهُ قَالَ وَيَوْمَ السَّبْتِ فَإِذَا كَانَ عِنْدَ الْعَصْرِ فَإِنْ بَقِيَ مِنْهُ شَيْءٌ سَقَاهُ الْخَدَمَ أَوْ أَمَرَ بِهِ فَأُهْرِيقَ
हमका बतावा गा है [वाकी] हमका [यह्या बिन उबैद] से [इब्न अब्बास] से [स्यूबाह] बताइस है कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने गुरुवार के रात नबीज़ - किण्वित खजूर का रस बनाइन अऊर गुरुवार अऊर शुक्रवार का पी लिहिन। -कथावाचक- कहिन; अऊर हम मानित है कि उ कहिन; "अऊर शनिवार का, अगर अशर के समय होत रहा तौ वहिमा से कुछ बचत रहा, तौ उ अपने नौकर का दे देत रहा या ओका फेंकै का आदेश देत रहा।"