Imam Ahmad : 1758
حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَنْبَأَنَا أَصْحَابُنَا مِنْهُمْ شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَبِي حَسَّانَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَشْعَرَ بَدَنَتَهُ مِنْ الْجَانِبِ الْأَيْمَنِ ثُمَّ سَلَتَ الدَّمَ عَنْهَا وَقَلَّدَهَا نَعْلَيْنِ
हमका बतावा गा है कि [हुसैम] हमका हमरे कई साथियन से कहिन है, जेहिमा [स्यूबाह] [कतदाह] से [अबू हसन] से [इब्न अब्बास] से कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने ऊँट का दाहिने तरफ तब तक खरोंचत रहे जब तक कि खून न निकल जाय, फिर खून का साफ किहिन अऊर ऊंटन के गर्दन के चारों ओर दुई चप्पल लटका दिहिन।