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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 1744

حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ أَبِي زِيَادٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ طَافَ بِالْبَيْتِ وَهُوَ عَلَى بَعِيرِهِ وَاسْتَلَمَ الْحَجَرَ بِمِحْجَنٍ كَانَ مَعَهُ قَالَ وَأَتَى السِّقَايَةَ فَقَالَ اسْقُونِي فَقَالُوا إِنَّ هَذَا يَخُوضُهُ النَّاسُ وَلَكِنَّا نَأْتِيكَ بِهِ مِنْ الْبَيْتِ فَقَالَ لَا حَاجَةَ لِي فِيهِ اسْقُونِي مِمَّا يَشْرَبُ مِنْهُ النَّاسُ

हमसे कहिन है [हुसैम] हमसे [यजीद बिन अबू जियाद] ['इकरीमा] से [इब्न अब्बास] से कहिन है कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने अपने वाहन पर काबा मा तवाफ किहिन। ऊ लाठी से काला पत्थर का छूइस अऊर चूमिस। इब्न अब्बास कहिन; तब ऊ पेयजल के भंडार मा आवा, अऊर ऊ कहिस: 'मुझे एक पानी पिलाओ'। सो मित्र कहिन; 'वास्तव मा, ई पानी है जेका लोग पीत हैं, अऊर अगर तुम चाहौ तौ हम घर से तुमरे पास लइ आबै'। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जवाब दिया: 'मुझे जरूरत नहीं है, लोग जो पियते हैं, वही से पियवाओ'।