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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Rasulullah membaca doa qunut ketika shalat witir
Imam Ahmad : 1637

قَالَ وَكَانَ يُعَلِّمُنَا هَذَا الدُّعَاءَ اللَّهُمَّ اهْدِنِي فِيمَنْ هَدَيْتَ وَعَافِنِي فِيمَنْ عَافَيْتَ وَتَوَلَّنِي فِيمَنْ تَوَلَّيْتَ وَبَارِكْ لِي فِيمَا أَعْطَيْتَ وَقِنِي شَرَّ مَا قَضَيْتَ إِنَّكَ تَقْضِي وَلَا يُقْضَى عَلَيْكَ إِنَّهُ لَا يَذِلُّ مَنْ وَالَيْتَ قَالَ شُعْبَةُ وَأَظُنُّهُ قَدْ قَالَ هَذِهِ أَيْضًا تَبَارَكْتَ رَبَّنَا وَتَعَالَيْتَ قَالَ شُعْبَةُ وَقَدْ حَدَّثَنِي مَنْ سَمِعَ هَذَا مِنْهُ ثُمَّ إِنِّي سَمِعْتُهُ حَدَّثَ بِهَذَا الْحَدِيثِ مَخْرَجَهُ إِلَى الْمَهْدِيِّ بَعْدَ مَوْتِ أَبِيهِ فَلَمْ يَشُكَّ فِي تَبَارَكْتَ وَتَعَالَيْتَ فَقُلْتُ لِشُعْبَةَ إِنَّكَ تَشُكُّ فِيهِ فَقَالَ لَيْسَ فِيهِ شَكٌّ

अजै ई पिछली हदीस रै समान संचरण मार्ग रो अनुसरण करता थका, [अल हसन] कह्यो; उण म्हानै आ प्रार्थना सिखाई; 'अल्लाहुम्महदीनी फी मन हदैत वा 'अफानी फी मन 'अफैत वा तवल्लानी फिमान तवल्लैत वा बरीक ली फी मा अथैत वकीनी स्यार्रा मा क़दैत, इन्नाहू ला यादजिल्लू मन वलाइत - हे अल्लाह, म्हानै मार्गदर्शन दो जियां कै थै म्हनै दियो है संरक्षण दियो जावै तो, म्हनै उण लोगां रै रूप मांय प्यार करो जिण भांत थै प्यार करो हो अर जो थै म्हनै दियो है बां नै आशीर्वाद देवो अर म्हानै उण बुरी किस्मत सूं दूर राखो जिणनै थै तय करियो है। साची, जिण रो थै बचाव करो हो, बां रो अपमान नीं होसी-'। शुबा कह्यो; अर म्हनै लागै कै बो भी कैयो हो; 'तबाराकता रब्बाना वा त'लैत -महिमामंडित हो, हे म्हारा प्रभु, परम ऊंचो हो।-' अर शु'बा बोल्यो; अर म्हैं किणी नै बतायो है जिणनै अल हसन सूं सुणी ही, अर म्हैं उणनै आ हदीस सुणाई जद बो आपरै पिता री मौत रै बाद अल महदी सूं मिलण नै निकळ्यो हो, अर स्यूबाह नै हदीस रै उच्चारण माथै कोई संदेह नीं हो; 'ताबाराकता रब्बाना वा त'लाइत -महिमा थारी है, हे म्हारा प्रभु, परम थारी है।-'। मुहम्मद बिन जाफर ने स्यूबाह सूं पूछ्यो; 'कांई थनै इण बाबत कोई संदेह है?' उण जवाब दियो; 'नीं'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 1625, 1631, 1637