Imam Ahmad : 1602
حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مَيْمُونٍ عَنْ سَعْدِ بْنِ سَمُرَةَ عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ عَنْ أَبِي عُبَيْدَةَ بْنِ الْجَرَّاحِ قَالَ كَانَ آخِرُ مَا تَكَلَّمَ بِهِ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ أَخْرِجُوا يَهُودَ الْحِجَازِ مِنْ جَزِيرَةِ الْعَرَبِ وَاعْلَمُوا أَنَّ شِرَارَ النَّاسِ الَّذِينَ يَتَّخِذُونَ الْقُبُورَ مَسَاجِدَ
हमसे कहिन है [अबू अहमद अज जुबैरी] हमसे [इब्राहिम बिन मैमून] से [सद बिन समुराह] से [समूराह बिन जुंदुब] से [अबू उबैदा बिन अल जर्राह] कहिन हैं; नबीयूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा बोले गए अंतिम शब्द रहे: 'अरब प्रायद्वीप मा हिजाज यहूदीयन का बाहर निकालौ, अऊर जानौ कि मनुष्यन मा सबसे बुरा लोग उ हैं जे अपने नबियन के कब्रन का मस्जिद के रूप मा उपयोग करत हैं'।