Fiqih Salab (harta pribadi musuh di medan perang untuk pembunuhnya: Kasus Abu Jahal dan Ibnu Akwa')
Imam Ahmad : 1583
حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ يُوسُفُ بْنُ يَعْقُوبَ الْمَاجِشُونُ عَنْ صَالِحِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّهُ قَالَ إِنِّي لَوَاقِفٌ يَوْمَ بَدْرٍ فِي الصَّفِّ نَظَرْتُ عَنْ يَمِينِي وَعَنْ شِمَالِي فَإِذَا أَنَا بَيْنَ غُلَامَيْنِ مِنْ الْأَنْصَارِ حَدِيثَةٍ أَسْنَانُهُمَا تَمَنَّيْتُ لَوْ كُنْتُ بَيْنَ أَضْلَعَ مِنْهُمَا فَغَمَزَنِي أَحَدُهُمَا فَقَالَ يَا عَمِّ هَلْ تَعْرِفُ أَبَا جَهْلٍ قَالَ قُلْتُ نَعَمْ وَمَا حَاجَتُكَ يَا ابْنَ أَخِي قَالَ بَلَغَنِي أَنَّهُ سَبَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَوْ رَأَيْتُهُ لَمْ يُفَارِقْ سَوَادِي سَوَادَهُ حَتَّى يَمُوتَ الْأَعْجَلُ مِنَّا قَالَ فَغَمَزَنِي الْآخَرُ فَقَالَ لِي مِثْلَهَا قَالَ فَتَعَجَّبْتُ لِذَلِكَ قَالَ فَلَمْ أَنْشَبْ أَنْ نَظَرْتُ إِلَى أَبِي جَهْلٍ يَجُولُ فِي النَّاسِ فَقُلْتُ لَهُمَا أَلَا تَرَيَانِ هَذَا صَاحِبُكُمَا الَّذِي تَسْأَلَانِ عَنْهُ فَابْتَدَرَاهُ فَاسْتَقْبَلَهُمَا فَضَرَبَاهُ حَتَّى قَتَلَاهُ ثُمَّ انْصَرَفَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرَاهُ فَقَالَ أَيُّكُمَا قَتَلَهُ فَقَالَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا أَنَا قَتَلْتُهُ قَالَ هَلْ مَسَحْتُمَا سَيْفَيْكُمَا قَالَا لَا فَنَظَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي السَّيْفَيْنِ فَقَالَ كِلَاكُمَا قَتَلَهُ وَقَضَى بِسَلَبِهِ لِمُعَاذِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْجَمُوحِ وَهُمَا مُعَاذُ بْنُ عَمْرِو بْنِ الْجَمُوحِ وَمُعَاذُ ابْنُ عَفْرَاءَ
हमका [अबू सलामा, यूसुफ बिन याकूब अल मजिस्यून] से [सालिह बिन इब्राहिम बिन अब्दुर्रहमान बिन औफ] से [अपने पिता] से [अपने दादा, अब्दुर्रहमान बिन औफ] से कहिन हैं; बदर के लड़ाई के दौरान मैं सैनिकन के एक लाइन मा खड़ा रहा, मैं बाएं अऊर दाएं देखिन, पता चला कि मैं दुई जवान अंसार बच्चन के बीच रहा। हम कल्पना किहेन कि हम दुइनौ से ज्यादा ताकतवर हई। अचानक दुइनौ मा से एक ने मोका इशारा किहिन अऊर पूछिन; 'ओ काका तुम अबू जहल का जानत हौ का?' हम जवाब दिहेन; 'हाँ, का चाही भइया के बेटवा?' उ जवाब दिहिन; "मोरे मन मा ई बात आई है कि उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अपमान किहिन है, जेकरे हाथ मा मोर आत्मा है, अगर हम ओका देखित, त हम ओका तब तक नाहीं छोड़ित जब तक कि हममें से एक जल्दी मर न जात।" फिर बाकी लोग मोहि इशारा किहिन अऊर मोसे वही बात पूछिन, तौ मैं ई देखि के हैरान रहि गयौं। कुछ देर बाद हम अबू जहल का देखेन, ऊ भीड़ के बीच मा घूमत रहा, तौ हम ओन दुइनौ का बतायेन; 'का तुम नाहीं देखत हौ, ऊ उहै मनई है जेकरे बारे मा तुम दुइनौ पूछत रहेव?' तौ दुइनौ जने ओनके पास पहुँचै के ताईं दौड़ लगाइन अऊर अबू जहल ओन दुइनौ का अभिवादन किहिन, लेकिन दुइनौ जवान ओनका तब तक पीटिन जब तक कि उइ दुइनौ ओनका मार नाइ दिहिन। फिर दुइनौ जने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गें अऊर ओनका सूचना दिहिन। ऊ पूछिस: 'ओका के मारिस'। हर एक जवाब दिहिस; 'मैं ओका मार डारिन'। ऊ फिरि पूछिस: 'का तू आपन दुइ तलवार साफ कइ लिहेव?' दुइनौ जने जवाब दिहिन; 'अबहूँ नाई'। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दुइनौ तलवारन का देखिन अऊर कहिन; 'दुनौ जने ओका मार डारिन हैं'। फिर उ फैसला किहिन कि अबू जहल के सामान मुआज़ बिन अमरू बिन अल जमूह के लिए रहा, अऊर दुइनौ लोग मुआज़ बिन अमरू बिन जमूह अऊर मुअदज बिन अफरा रहें।