Imam Ahmad : 1534
حَدَّثَنَا رَوْحٌ حَدَّثَنَا ابْنُ عَوْنٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ الْأَسْوَدِ عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدٍ عَنْ أَبِيهِ قَالَ لَمَّا كَانَ يَوْمُ الْخَنْدَقِ وَرَجُلٌ يَتَتَرَّسُ جَعَلَ يَقُولُ بِالتُّرْسِ هَكَذَا فَوَضَعَهُ فَوْقَ أَنْفِهِ ثُمَّ يَقُولُ هَكَذَا يُسَفِّلُهُ بَعْدُ قَالَ فَأَهْوَيْتُ إِلَى كِنَانَتِي فَأَخْرَجْتُ مِنْهَا سَهْمًا مُدَمًّا فَوَضَعْتُهُ فِي كَبِدِ الْقَوْسِ فَلَمَّا قَالَ هَكَذَا يُسَفِّلُ التُّرْسَ رَمَيْتُ فَمَا نَسِيتُ وَقْعَ الْقِدْحِ عَلَى كَذَا وَكَذَا مِنْ التُّرْسِ قَالَ وَسَقَطَ فَقَالَ بِرِجْلِهِ فَضَحِكَ نَبِيُّ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحْسِبُهُ قَالَ حَتَّى بَدَتْ نَوَاجِذُهُ قَالَ قُلْتُ لِمَ قَالَ لِفِعْلِ الرَّجُلِ
हमसे कहिस है [रौह] हमसे कहिस है [इब्न औन] से [मुहम्मद बिन अल असवाद] से [अमीर बिन सद] से [उनके पिता] ने कहा; 'खंडक के लड़ाई के दौरान, एक आदमी -दुश्मन- रहा, जे अपनी ढाल से आवरण लिहिस, ऊ आपन ढाल पकड़े हुए -अपमान- कहिस, आपन ढाल नाक के ऊपर रखत, फिर आपन ढाल नीचे रखत -अपमान- अइसन कहिस। तौ हम आपन तीर तीर लिहेन फिर हम तीर निकालेन जवन खून से लथपथ रहा, फिर हम ओका धनुष के बीच मा रख दिहेन। जब उ आपन ढाल नीचे करत ई कहिन, त हम तुरंत ओनके ऊपर निशाना लगाइन। हम नाहीं भूलित कि तीर ढाल के ई अऊर ऊ हिस्सा मा लाग, फिर ऊ आदमी गिर गा'। स'द ने अपने पैरन से ईका देखावा। तौ नबीयूल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हँस दिहिन। -हमका लाग कि स'द कहिन; 'जब तक ओकर दाढ़ न देखा जाय'।- राउह ने पूछा; 'काहे हँस रहा है?' इब्न औन ने जवाब दिया; 'काहे से कि उ स'द के व्यवहार देखिन'।