Imam Ahmad : 1360
حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ هِشَامٍ حَدَّثَنَا هِشَامٌ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَلِمَةَ أَوْ مَسْلَمَةَ قَالَ كَثِيرٌ وَحِفْظِي سَلِمَةَ عَنْ عَلِيٍّ أَوْ عَنِ الزُّبَيْرِ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَخْطُبُنَا فَيُذَكِّرُنَا بِأَيَّامِ اللَّهِ حَتَّى نَعْرِفَ ذَلِكَ فِي وَجْهِهِ وَكَأَنَّهُ نَذِيرُ قَوْمٍ يُصَبِّحُهُمْ الْأَمْرُ غُدْوَةً وَكَانَ إِذَا كَانَ حَدِيثَ عَهْدٍ بِجِبْرِيلَ لَمْ يَتَبَسَّمْ ضَاحِكًا حَتَّى يَرْتَفِعَ عَنْهُ
हमसे कहिस है [कत्सिर बिन हिशम] हमसे [हिस्याम] से [अबू जुबैर] से [अब्दुल्लाह बिन सलामा] या मसलमाह से कहिस है, कटसिर ने समझाया; मोर याद के अनुसार सलीमा, [अली] से या [जुबैर] से कहिन; 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमका एक उपदेश दिया, फिर उन्होंने हमें अल्लाह के दिनों के बारे में याद दिलाया जब तक कि हम उनके चेहरे से पता नहीं चला। -उ समय- मानो ऊ एक अइसन लोगन का चेतावनी देत रहा जेका सुबह कउनौ चीज से टकरा गा रहा। अऊर जब उ जिब्रिल से रहस्योद्घाटन प्राप्त किहिन, तौ उ मुस्कुराइन या हँसिन जब तक कि गेब्रियल ओनका नाहीं छोड़िन।'