Imam Ahmad : 1203
حَدَّثَنَا عَبْد اللَّهِ حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ مُحَمَّدٍ النَّاقِدُ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ الرَّقِّيُّ حَدَّثَنَا حَفْصٌ أَبُو عُمَرَ عَنْ كَثِيرِ بْنِ زَاذَانَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ ضَمْرَةَ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ قَرَأَ الْقُرْآنَ فَاسْتَظْهَرَهُ شُفِّعَ فِي عَشَرَةٍ مِنْ أَهْلِ بَيْتِهِ قَدْ وَجَبَتْ لَهُمْ النَّارُ
हमसे कहिस है अब्दुल्ला, हमसे कहिस है [अमरू बिन मुहम्मद अन नकीद] हमसे कहिस है [अमरू बिन उथमान अर राकी] हमसे [हाफस, अबू उमर] से [कत्सिर बिन ज़दान] से [अशिम बिन धमराह] से [अली राधियाल्लाह अन्हु] से कहिस है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'जे कुरान पढ़त है अऊर फिर ओका याद करत है, तब उ अपने परिवार के दस लोगन के लिए शौफिया कर सकत है जे नरक जाय का ठान लिहिन हैं'।