Imam Ahmad : 1153
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ الْحُرِّ حَدَّثَنَا الْحَكَمُ بْنُ عُتَيْبَةَ عَنْ رَجُلٍ يُدْعَى حَنَشًا عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كَسَفَتْ الشَّمْسُ فَصَلَّى عَلِيٌّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ لِلنَّاسِ فَقَرَأَ يس أَوْ نَحْوَهَا ثُمَّ رَكَعَ نَحْوًا مِنْ قَدْرِ السُّورَةِ ثُمَّ رَفَعَ رَأْسَهُ فَقَالَ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ ثُمَّ قَامَ قَدْرَ السُّورَةِ يَدْعُو وَيُكَبِّرُ ثُمَّ رَكَعَ قَدْرَ قِرَاءَتِهِ أَيْضًا ثُمَّ قَالَ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ ثُمَّ قَامَ أَيْضًا قَدْرَ السُّورَةِ ثُمَّ رَكَعَ قَدْرَ ذَلِكَ أَيْضًا حَتَّى صَلَّى أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ ثُمَّ قَالَ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ ثُمَّ سَجَدَ ثُمَّ قَامَ فِي الرَّكْعَةِ الثَّانِيَةِ فَفَعَلَ كَفِعْلِهِ فِي الرَّكْعَةِ الْأُولَى ثُمَّ جَلَسَ يَدْعُو وَيَرْغَبُ حَتَّى انْكَشَفَتْ الشَّمْسُ ثُمَّ حَدَّثَهُمْ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَذَلِكَ فَعَلَ
हमका बतावा है [यह्या बिन आदम] हमसे कहिस है [जुहैर] हमसे कहिस है [अल हसन बिन अल हुर] हमसे [अल हाकम बिन उतैबा] [अली] राधियाल्लाह अनहू से [हनासी] नामक एक व्यक्ति के बारे मा बताइस है, उ कहिन; सूर्य ग्रहण रहा, तो अली राधियाल्लाह अन्हू लोगन के साथ प्रार्थना किहिन, उ यासीन या कुछ अउर चिट्ठी पढ़िन, फिर लगभग एक चिट्ठी के लिए प्रणाम किहिन। तब प्रणाम से उठि के पाठ करौ; 'समी'अल्लाहु लिमान हमिदाह' फिर लगभग एक सूरत के पाठ के लिए खड़ा होत है, फिर नमाज अऊर तकबीर करत है, फिर लगभग एक सूरत के लिए फिर से प्रणाम करत है अऊर कहत है 'समी'अल्लाहु लिमान हमिदाह' फिर लगभग एक सूरत के पाठ के लिए फिर से उठत है जब तक कि उ चार बार नमाज न करत है तब तक 'सैमीअल्लाहु लिमान हमिदाह' पढ़त है। हमिदा तब सजदा करत है अऊर दूसर रकात के लिए उठत है फिर उ वइसने करत है जइसे उ पहिला रकात मा किहिन रहा। उसके बाद सूर्य ग्रहण रुकने तक प्रार्थना और भीख मांगते बैठे रहे, फिर बोले; 'वास्तव मा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अइसने किहिन'।