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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 1114

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ مَيْسَرَةَ عَنِ النَّزَّالِ بْنِ سَبْرَةَ أَنَّهُ شَهِدَ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ صَلَّى الظُّهْرَ ثُمَّ جَلَسَ فِي الرَّحَبَةِ فِي حَوَائِجِ النَّاسِ فَلَمَّا حَضَرَتْ الْعَصْرُ أُتِيَ بِتَوْرٍ فَأَخَذَ حَفْنَةَ مَاءٍ فَمَسَحَ يَدَيْهِ وَذِرَاعَيْهِ وَوَجْهَهُ وَرَأْسَهُ وَرِجْلَيْهِ ثُمَّ شَرِبَ فَضْلَهُ وَهُوَ قَائِمٌ ثُمَّ قَالَ إِنَّ نَاسًا يَكْرَهُونَ أَنْ يَشْرَبُوا وَهُمْ قِيَامٌ وَإِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَنَعَ كَمَا صَنَعْتُ وَهَذَا وُضُوءُ مَنْ لَمْ يُحْدِثْ حَدَّثَنَا عَفَّانُ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ مَيْسَرَةَ قَالَ سَمِعْتُ النَّزَّالَ بْنَ سَبْرَةَ قَالَ سَمِعْتُ عَلِيًّا رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ إِلَّا أَنَّهُ قَالَ أُتِيَ بِكُوزٍ

हमका बतावा गा है [मुहम्मद बिन जाफर] हमका [अब्दुल मलिक बिन मैसरह] से [अन नजल बिन सबराह] से [स्यूबाह] से कहिन है कि उ [अली] राधियाल्लाह 'अन्हू का दुपहरिया के नमाज पढ़त अऊर फिर रहबाह मा लोगन के जरूरतन का पूरा करै के लिए बैठत देखिन। जब असर का समय भवा तौ उनके पास एक बर्तन लाया गा, दुइनौ हाथन से पानी लिहिन, हाथ, कोहनी, मुँह, सिर-पाँव पोंछिन, फिर खड़ा होके वजू से बचा पानी पिय लिहिन। तब उ कहिन; 'कुछ लोग हैं जिनका खड़ा होइके पीना पसंद नाहीं है, भले ही रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम वइसने किहिन जइसे हम किहेन। जिन लोगन के पास हदत नाहीं है, ओनके लिए ई वजू के प्रक्रिया है। हमसे कहिस है ['अफ्फान] हमसे कहिस है [स्यूबाह] हमसे कहिस है [अब्दुल मलिक बिन मैसरह] कहिन; हम [अन नजल बिन सबराह] का कहत सुने रहेन; सुना [अली राधियाल्लाह अन्हू], फिर उन्होंने अर्थ बताया लेकिन उन्होंने लफाझ का प्रयोग किया; उनका एक चायदानी लावा गा रहा।