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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



इमाम अहमद : 1038

حَدَّثَنَا عَبْد اللَّهِ حَدَّثَنِي أَبُو خَيْثَمَةَ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنِ الْأَعْمَشِ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ أَبِي الْبَخْتَرِيِّ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ قَالَ قَالَ عَلِيٌّ إِذَا حُدِّثْتُمْ عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَدِيثًا فَظُنُّوا بِهِ الَّذِي هُوَ أَهْيَا وَالَّذِي هُوَ أَهْدَى وَالَّذِي هُوَ أَتْقَى

हमें बताया है अब्दुल्लाह ने, मुझे बताया है [अबू खैतसमा, ज़ुहैर बिन हरब] ने हमें बताया है [जरीर] ने [अल अमासी] से [अमरू बिन मुर्रा] से [अबू अल बख्तरी] से [अबू अब्दुर्रहमान अस सुलामी] ने कहा; [अली] रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा; "अगर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ़ से कोई हदीस तुम तक पहुँचे तो उसे सबसे ज़्यादा हिम्मत देने वाला, सबसे ज़्यादा रास्ता दिखाने वाला और सबसे ज़्यादा नेक इंसान समझो।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 938, 939, 940, 988, 1027, 1028, 1038, 3463, 3744
इमाम इब्नु माजा : 19, 20
इमाम दरिमी : 587, 591