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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Rasulullah berwudhu tiga kali tiga kali

Imam Ahmad : 942

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ حَدَّثَنِي مَالِكُ بْنُ عُرْفُطَةَ سَمِعْتُ عَبْدَ خَيْرٍ قَالَ كُنْتُ عِنْدَ عَلِيٍّ فَأُتِيَ بِكُرْسِيٍّ وَتَوْرٍ قَالَ فَغَسَلَ كَفَّيْهِ ثَلَاثًا وَوَجْهَهُ ثَلَاثًا وَذِرَاعَيْهِ ثَلَاثًا وَمَسَحَ بِرَأْسِهِ وَصَفَ يَحْيَى فَبَدَأَ بِمُقَدَّمِ رَأْسِهِ إِلَى مُؤَخَّرِهِ وَقَالَ وَلَا أَدْرِي أَرَدَّ يَدَهُ أَمْ لَا وَغَسَلَ رِجْلَيْهِ ثُمَّ قَالَ مَنْ أَحَبَّ أَنْ يَنْظُرَ إِلَى وُضُوءِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَهَذَا وُضُوءُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ الْقُطَيْعِيُّ قَالَ لَنَا أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ هَذَا أَخْطَأَ فِيهِ شُعْبَةُ إِنَّمَا هُوَ عَنْ خَالِدِ بْنِ عَلْقَمَةَ عَنْ عَبْدِ خَيْرٍ

हमसे [यह्या बिन सईद] [स्यूबाह] से कहिन है, हमसे [मलिक बिन उर्फिताह] कहिन हैं, हम [अब्दु खैर] का कहत सुने रहेन; 'मैं [अली] के बगल मा रहा, अऊर उ लोग ओके लिए एक कुर्सी अऊर एक छोट पत्थर के बर्तन लइ आए'। अब्दु खैर कहिन; "फिर ऊ तीन बार हाथ धोइस, तीन बार मुँह, तीन बार बांह धोइस अऊर आपन माथा पोंछिस।" -यह्या आगे से पीछे शुरू करके और कहकर अभ्यास किया; 'जानित नाहीं, हाथ दोहराय कि नाहीं'।- फिर दूनौ पाँव धोय के कहिन; 'जे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के वजू के प्रक्रिया देखै चाहत है तौ ओकर वजू इहै चला'। अबू बकर अल कुथाई ने कहा; अबू अब्दुर्रहमान हमसे कहिन; 'इस हदीस में स्यूबाह गलत है, सही खालिद बिन 'अलकामह से अब्दु खैर' से है।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 380, 381, 410, 442, 456, 496, 522, 523, 591, 834, 866, 875, 884, 901, 924, 942, 951, 958, 967, 975, 995, 998, 1136, 1137, 1142, 1208, 1255, 1274, 1279, 1280, 1281, 1285, 1289, 3346, 4306, 4587, 5883, 8223, 15583, 15591, 15836, 15848, 15850, 15857, 15861, 15864, 15872, 16558, 17804, 21189, 21251, 21278, 21821, 25774, 25776
Imam Bukhari : 155, 159, 179, 184, 190, 246, 247, 409, 1798
Imam Muslim : 331, 332, 337, 346, 347, 476, 494
Imam Abu Dawud : 96, 97, 98, 99, 100, 101, 102, 103, 105, 107, 108, 114, 116
Imam Tirmidzi : 35, 41, 44, 45
Imam Nasa'i : 80, 82, 83, 84, 89, 90, 91, 92, 93, 94, 95, 96, 97, 98, 99, 114, 115, 244, 245
Imam Ibnu Majah : 398, 407, 408, 409, 410, 411, 412, 413, 416, 428, 450
Imam Malik : 29
Imam Darimi : 689, 703