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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Turunnya peringatan dari Qs. Al-kahfi ayat 54 karena Manusia adalah makhluq yang paling banyak membantah

Imam Ahmad : 542

حَدَّثَنَا عَبْد اللَّهِ قَالَ كَتَبَ إِلَيَّ قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ كَتَبْتُ إِلَيْكَ بِخَطِّي وَخَتَمْتُ الْكِتَابَ بِخَاتَمِي يَذْكُرُ أَنَّ اللَّيْثَ بْنَ سَعْدٍ حَدَّثَهُمْ عَنْ عُقَيْلٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عَلِيِّ بْنِ الْحُسَيْنِ أَنَّ الْحُسَيْنَ بْنَ عَلِيٍّ حَدَّثَهُ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ طَرَقَهُ وَفَاطِمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا فَقَالَ أَلَا تُصَلُّونَ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّمَا أَنْفُسُنَا بِيَدِ اللَّهِ فَإِذَا شَاءَ أَنْ يَبْعَثَنَا بَعَثَنَا وَانْصَرَفَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ قُلْتُ لَهُ ذَلِكَ ثُمَّ سَمِعْتُهُ وَهُوَ مُدْبِرٌ يَضْرِبُ فَخِذَهُ وَيَقُولُ { وَكَانَ الْإِنْسَانُ أَكْثَرَ شَيْءٍ جَدَلًا }

हमका अब्दुल्ला बताय के, उ कहिन; [कुतैबा बिन सैद] ने मोका एक चिट्ठी लिखी जेहिमा रहा; हम तोहका आपन लिखित चिट्ठी लिखे रहेन, अउर चिट्ठी पै आपन मोहर लगाय दिहे रहेन। उ उल्लेख किहिन कि [लैत्स बिन सद] ने ओनका [उकैल] से [अज़ जुहरी] से [अली बिन अल हुसैन] से बतावा रहा कि [अल हुसैन बिन अली] ने ओनका [अली बिन अबू तालिब] से बतावा रहा, कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दरवाजा खटखटाइन - जगावत - ओनका अऊर फातिमा राहुअल्लाम तब कहिन: तुम प्रार्थना करत हौ?' त हम जवाब दिहेन; 'हे अल्लाह के रसूल, केवल हमार आत्मा अल्लाह के हाथ मा है, अगर उ हमका जगावै चाहत है तौ उ हमका जरूर जगा देई'। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब चले गये जब हमने उनसे यह कहा, लेकिन हमने सुना कि जब उ पढ़त रहे: -अऊर मनुष्य उ प्राणी हैं जे सबसे ज्यादा बहस करत हैं।- -क्यूएस अल कहफ: 54-

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 539, 542, 667, 858
Imam Muslim : 1294
Imam Nasa'i : 1593, 1594