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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ahmad : 525

حَدَّثَنَا عَبْد اللَّهِ حَدَّثَنِي أَبِي وَأَبُو خَيْثَمَةَ قَالَا حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ عَمْرٍو حَدَّثَنَا زَائِدَةُ عَنْ عَاصِمٍ عَنْ شَقِيقٍ قَالَ لَقِيَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ الْوَلِيدَ بْنَ عُقْبَةَ فَقَالَ لَهُ الْوَلِيدُ مَا لِي أَرَاكَ قَدْ جَفَوْتَ أَمِيرَ الْمُؤْمِنِينَ عُثْمَانَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ أَبْلِغْهُ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ وَأَمَّا قَوْلُهُ إِنِّي تَخَلَّفْتُ يَوْمَ بَدْرٍ فَإِنِّي كُنْتُ أُمَرِّضُ رُقَيَّةَ بِنْتَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حَتَّى مَاتَتْ وَقَدْ ضَرَبَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِسَهْمٍ وَمَنْ ضَرَبَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِسَهْمٍ فَقَدْ شَهِدَ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ بِطُولِهِ إِلَى آخِرِهِ

हमसे कहिस है अब्दुल्ला, हमसे कहिस है कि हमार पिता अऊर [अबू खैत्सामा] दुइनौ कहिन; हमसे [मुआविया बिन अमरू] बताइस है [जैदा] से [अशिम] से [स्याक] कहिस है; अब्दुर्रहमान बिन औफ अल वालिद बिन उकबा से मिले, तब अल वालिद ने उनसे कहा; 'का बात है, हम देखेन कि तुम अमीरुल मुकमिनिन [उथमान] के साथ अभद्रता करत हौ?' अब्दुर्रहमान जवाब दिहिन; 'उसे बताओ,' फिर उ हदीस का जिक्र किहिन, 'जहाँ तक उ जवन कहिन, वास्तव मा मैं बदर के लड़ाई से पीछे रह गय रहौं, काहे से कि मैं रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के बिटिया रुकैया के देखभाल किहे रहेंव, जे तब तक बीमार रही जब तक कि उ मर नाहीं गइन, अऊर वास्तव मा रसूलुल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के लिए मेरे लिए तीर भी निवेदन किहिन रहैं, ओकर तीर रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा ओकरे लिए निशाना लगावा गा रहा मतलब उ गवाही दिहिस है'। फिर उ एक लंबी हदीस का जिक्र किहिन जब तक कि उ खतम नाइ होइ गवा।