Imam Ahmad : 30
حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ قَالَ أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ عَنْ قَيْسِ بْنِ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي بَكْرٍ الصِّدِّيقِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ هَذِهِ الْآيَةَ { يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا عَلَيْكُمْ أَنْفُسَكُمْ لَا يَضُرُّكُمْ مَنْ ضَلَّ إِذَا اهْتَدَيْتُمْ } وَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّ النَّاسَ إِذَا رَأَوْا الظَّالِمَ فَلَمْ يَأْخُذُوا عَلَى يَدَيْهِ أَوْشَكَ أَنْ يَعُمَّهُمْ اللَّهُ بِعِقَابِهِ
हमका [यजीद बिन हारून] बताय के बाद उ कहिन; हमका [इस्माइल बिन अबू खालिद] का [कैस बिन अबू हाजिम] से [अबू बकर अश शिद्दीक] से सूचित किहिन है, उ कहिन; 'हे लोग, निस्चय ही तुम ई श्लोक पढ़त हौ: 'हे तुम जे बिसवास करत हौ, खुद का रखौ; अगर आपका मार्गदर्शन मिला है तो कोई गुमराह व्यक्ति नहीं है जो आपका नुकसान पहुंचाए'। - -QS अल मैदाह आयत 105-, अऊर वास्तव मा हम पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुने रहेन: 'वास्तव मा, अगर लोग एक अन्यायी का देखत हैं, लेकिन उ ओकर हाथ नाहीं रोकत हैं, तौ डर है कि अल्लाह ओन सबका सजा देई'।