Imam Bukhari : 4882
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ يَزِيدَ مَوْلَى الْمُنْبَعِثِأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سُئِلَ عَنْ ضَالَّةِ الْغَنَمِ فَقَالَ خُذْهَا فَإِنَّمَا هِيَ لَكَ أَوْ لِأَخِيكَ أَوْ لِلذِّئْبِ وَسُئِلَ عَنْ ضَالَّةِ الْإِبِلِ فَغَضِبَ وَاحْمَرَّتْ وَجْنَتَاهُ وَقَالَ مَا لَكَ وَلَهَا مَعَهَا الْحِذَاءُ وَالسِّقَاءُ تَشْرَبُ الْمَاءَ وَتَأْكُلُ الشَّجَرَ حَتَّى يَلْقَاهَا رَبُّهَا وَسُئِلَ عَنْ اللُّقَطَةِ فَقَالَ اعْرِفْ وِكَاءَهَا وَعِفَاصَهَا وَعَرِّفْهَا سَنَةً فَإِنْ جَاءَ مَنْ يَعْرِفُهَا وَإِلَّا فَاخْلِطْهَا بِمَالِكَقَالَ سُفْيَانُ فَلَقِيتُ رَبِيعَةَ بْنَ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَ سُفْيَانُ وَلَمْ أَحْفَظْ عَنْهُ شَيْئًا غَيْرَ هَذَا فَقُلْتُ أَرَأَيْتَ حَدِيثَ يَزِيدَ مَوْلَى المُنْبَعِثِ فِي أَمْرِ الضَّالَّةِ هُوَ عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ قَالَ نَعَمْ قَالَ يَحْيَى وَيَقُولُ رَبِيعَةُ عَنْ يَزِيدَ مَوْلَى الْمُنْبَعِثِ عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ قَالَ سُفْيَانُ فَلَقِيتُ رَبِيعَةَ فَقُلْتُ لَهُ
हमसे [अली बिन अब्दुल्ला] [यह्या बिन सैद] से [यजीद मौला अल मुनबैत्स] से [सुफयान] से कहिन है कि; एक बार पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक आवारा बकरी के बारे मा पूछा गा रहा, तौ उ कहिन: 'वास्तव मा बकरी तोहार है, या तोहरे भाई के है या भेड़िया के है'। तब उनसे लापता ऊँट के बारे में पूछा गया तो उनकर चेहरा लाल हो गया और उन्होंने कहा : 'तुम हिंया काहे हौ, का ऊँट के पास जूता अउर पानी के टंकी नाहीं है जेसे ऊ पेय लेत है? अऊर का ऊ पौधा भी नाहीं खा सकत है जब तक कि ऊ आपन मालिक नाहीं पावत है?' यहिके बाद मिले सामान के बारे मा पूछा गा। तौ उ कहिन: 'कृपया रस्सी अऊर ढक्कन का चिन्हित करा, अऊर एक साल के लिए वस्तु घोषित करा। अगर केहू आवै अऊर यहिके बारे मा जानत है, तौ ओका दइ द्या अऊर अगर नाहीं, तौ आप अपने धन मा मिला सकत हौ'। [सुफयान] कहिन; फिर मैं [रबीअह बिन अबू अब्दुर्रहमान] से मिला। सुफयान कहिन; हमका यहिके अलावा कुछौ याद नाहीं रहा; हम कहेन, 'खोई चीजन के बारे मा यजीद मौला अल मुनबैत्स के हदीस के बारे मा आपका का विचार है। ऊ हदीस यजीद बिन खालिद से है?' उ जवाब दिहिन; हाँ। [यह्या] कहिन; [रबिया] कहिन; [यजीद] [जैद बिन खालिद] के अल मुनबाइट्स दास से। सुफयान कहिन; यहिसे हम रबिया से मिलेन अऊर उनसे पूछेन।