Nabi menolak pengakuan Ma'iz hingga empat kali, lalu memastikan ia tidak gila dan sudah menikah sebelum memerintahkan rajam
Imam Bukhari : 4866
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَسَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَأَتَى رَجُلٌ مِنْ أَسْلَمَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ فِي الْمَسْجِدِ فَنَادَاهُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ الْأَخِرَ قَدْ زَنَى يَعْنِي نَفْسَهُ فَأَعْرَضَ عَنْهُ فَتَنَحَّى لِشِقِّ وَجْهِهِ الَّذِي أَعْرَضَ قِبَلَهُ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ الْأَخِرَ قَدْ زَنَى فَأَعْرَضَ عَنْهُ فَتَنَحَّى لِشِقِّ وَجْهِهِ الَّذِي أَعْرَضَ قِبَلَهُ فَقَالَ لَهُ ذَلِكَ فَأَعْرَضَ عَنْهُ فَتَنَحَّى لَهُ الرَّابِعَةَ فَلَمَّا شَهِدَ عَلَى نَفْسِهِ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ دَعَاهُ فَقَالَ هَلْ بِكَ جُنُونٌ قَالَ لَا فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اذْهَبُوا بِهِ فَارْجُمُوهُ وَكَانَ قَدْ أُحْصِنَوَعَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي مَنْ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ الْأَنْصَارِيَّ قَالَ كُنْتُ فِيمَنْ رَجَمَهُ فَرَجَمْنَاهُ بِالْمُصَلَّى بِالْمَدِينَةِ فَلَمَّا أَذْلَقَتْهُ الْحِجَارَةُ جَمَزَ حَتَّى أَدْرَكْنَاهُ بِالْحَرَّةِ فَرَجَمْنَاهُ حَتَّى مَاتَ
हमसे कहिस है [अबुल यामन] हमसे [शुआइब] [अज जुहरी] से कहिस है, उ कहिन; ई मोका [अबू सलामा बिन अब्दुर्रहमान] अऊर [सैद बिन अल मुसय्यब] से बतावा गा है कि [अबू हुरैरा] कहिन; बानी असलम से एक आदमी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आवा जवन उ समय मस्जिद मा रहा। ऊ आदमी ओका बोलाइस अऊर कहिस, 'हे अल्लाह के रसूल, वाकई अल अखिरा - मतलब खुद - व्यभिचार किहिस है'। फिर ऊ ओसे मुँह फेर लिहिस। ऊ आदमी अपने चेहरा के ओर वापस मुड़ा अऊर बोला, 'हे अल्लाह के रसूल, वाकई अल अखिर ने व्यभिचार किहिन है'। ऊ फिर से मुँह फेर लिहिस, अऊर ऊ आदमी जवान आदमी के सामना करै के लिए वापस मुड़ गवा अऊर फिर से कहिस, लेकिन ऊ फिर भी मुँह फेर लिहिस। तौ चौथी बार, उ ओनके सामना करै के लिए वापस मुड़े अऊर चार गवाहन के साथे अपने खिलाफ गवाही दिहिन, अंत मा उ ओनका बोलाइस अऊर पूछिस: 'का तोहका कौनो मानसिक बीमारी है?' ऊ मनई जवाब दिहिस, 'नहीं'। तौ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'आदमी का लइ जा अऊर ओका पत्थर मारौ'। अऊर सचमुच उ मनई शादीशुदा रहा। अऊर [अज जुहरी] से उ कहिन; मोका [एक] मनई के सूचना दिहिस है जे [जाबिर बिन अब्दुल्लाह अल अंसारी] का कहत सुना है; हम ओनमा से एक रहेन जे ओका पत्थर मारिन। हम मदीना के एक चौड़े मैदान मा ओका पत्थर मार दिहेन। जबै वा मड़ई का पत्थर लाग तौ वा भाग गा तौ हम वहिके पीछा कइके पकरि लिहेन अउर फेर वहिके मउत तक पत्थर मार के मार डारिन।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 40, 2726, 2871, 12206, 13938, 15369, 17794, 19873, 19890, 19938, 20075, 20078, 20886, 20889, 20890
Imam Bukhari : 4865, 4866, 6316, 6317, 6321, 6325, 6633
Imam Muslim : 3202, 3203, 3204, 3205, 3212
Imam Abu Dawud : 3805, 3838, 3840, 3841, 3843, 3844, 3848, 3850, 3857, 3858, 3925
Imam Tirmidzi : 1347, 1349
Imam Nasa'i : 1930, 3976, 3977
Imam Ibnu Majah : 2544, 2548
Imam Malik : 1291
Imam Darimi : 2212, 2213, 2216