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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Kisah 11 wanita berjanji tidak menyembunyikan sifat suami masing-masing, Nabi bersabda kepada Aisyah: terhadapmu aku seperti Abu zar'in terhadap Ummu zar'in

Imam Bukhari : 4790

حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَعَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَا أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْجَلَسَ إِحْدَى عَشْرَةَ امْرَأَةً فَتَعَاهَدْنَ وَتَعَاقَدْنَ أَنْ لَا يَكْتُمْنَ مِنْ أَخْبَارِ أَزْوَاجِهِنَّ شَيْئًا قَالَتْ الْأُولَى زَوْجِي لَحْمُ جَمَلٍ غَثٍّ عَلَى رَأْسِ جَبَلٍ لَا سَهْلٍ فَيُرْتَقَى وَلَا سَمِينٍ فَيُنْتَقَلُ قَالَتْ الثَّانِيَةُ زَوْجِي لَا أَبُثُّ خَبَرَهُ إِنِّي أَخَافُ أَنْ لَا أَذَرَهُ إِنْ أَذْكُرْهُ أَذْكُرْ عُجَرَهُ وَبُجَرَهُ قَالَتْ الثَّالِثَةُ زَوْجِي الْعَشَنَّقُ إِنْ أَنْطِقْ أُطَلَّقْ وَإِنْ أَسْكُتْ أُعَلَّقْ قَالَتْ الرَّابِعَةُ زَوْجِي كَلَيْلِ تِهَامَةَ لَا حَرٌّ وَلَا قُرٌّ وَلَا مَخَافَةَ وَلَا سَآمَةَ قَالَتْ الْخَامِسَةُ زَوْجِي إِنْ دَخَلَ فَهِدَ وَإِنْ خَرَجَ أَسِدَ وَلَا يَسْأَلُ عَمَّا عَهِدَ قَالَتْ السَّادِسَةُ زَوْجِي إِنْ أَكَلَ لَفَّ وَإِنْ شَرِبَ اشْتَفَّ وَإِنْ اضْطَجَعَ الْتَفَّ وَلَا يُولِجُ الْكَفَّ لِيَعْلَمَ الْبَثَّ قَالَتْ السَّابِعَةُ زَوْجِي غَيَايَاءُ أَوْ عَيَايَاءُ طَبَاقَاءُ كُلُّ دَاءٍ لَهُ دَاءٌ شَجَّكِ أَوْ فَلَّكِ أَوْ جَمَعَ كُلًّا لَكِ قَالَتْ الثَّامِنَةُ زَوْجِي الْمَسُّ مَسُّ أَرْنَبٍ وَالرِّيحُ رِيحُ زَرْنَبٍ قَالَتْ التَّاسِعَةُ زَوْجِي رَفِيعُ الْعِمَادِ طَوِيلُ النِّجَادِ عَظِيمُ الرَّمَادِ قَرِيبُ الْبَيْتِ مِنْ النَّادِ قَالَتْ الْعَاشِرَةُ زَوْجِي مَالِكٌ وَمَا مَالِكٌ مَالِكٌ خَيْرٌ مِنْ ذَلِكِ لَهُ إِبِلٌ كَثِيرَاتُ الْمَبَارِكِ قَلِيلَاتُ الْمَسَارِحِ وَإِذَا سَمِعْنَ صَوْتَ الْمِزْهَرِ أَيْقَنَّ أَنَّهُنَّ هَوَالِكُ قَالَتْ الْحَادِيَةَ عَشْرَةَ زَوْجِي أَبُو زَرْعٍ وَمَا أَبُو زَرْعٍ أَنَاسَ مِنْ حُلِيٍّ أُذُنَيَّ وَمَلَأَ مِنْ شَحْمٍ عَضُدَيَّ وَبَجَّحَنِي فَبَجِحَتْ إِلَيَّ نَفْسِي وَجَدَنِي فِي أَهْلِ غُنَيْمَةٍ بِشِقٍّ فَجَعَلَنِي فِي أَهْلِ صَهِيلٍ وَأَطِيطٍ وَدَائِسٍ وَمُنَقٍّ فَعِنْدَهُ أَقُولُ فَلَا أُقَبَّحُ وَأَرْقُدُ فَأَتَصَبَّحُ وَأَشْرَبُ فَأَتَقَنَّحُ أُمُّ أَبِي زَرْعٍ فَمَا أُمُّ أَبِي زَرْعٍ عُكُومُهَا رَدَاحٌ وَبَيْتُهَا فَسَاحٌ ابْنُ أَبِي زَرْعٍ فَمَا ابْنُ أَبِي زَرْعٍ مَضْجَعُهُ كَمَسَلِّ شَطْبَةٍ وَيُشْبِعُهُ ذِرَاعُ الْجَفْرَةِ بِنْتُ أَبِي زَرْعٍ فَمَا بِنْتُ أَبِي زَرْعٍ طَوْعُ أَبِيهَا وَطَوْعُ أُمِّهَا وَمِلْءُ كِسَائِهَا وَغَيْظُ جَارَتِهَا جَارِيَةُ أَبِي زَرْعٍ فَمَا جَارِيَةُ أَبِي زَرْعٍ لَا تَبُثُّ حَدِيثَنَا تَبْثِيثًا وَلَا تُنَقِّثُ مِيرَتَنَا تَنْقِيثًا وَلَا تَمْلَأُ بَيْتَنَا تَعْشِيشًا قَالَتْ خَرَجَ أَبُو زَرْعٍ وَالْأَوْطَابُ تُمْخَضُ فَلَقِيَ امْرَأَةً مَعَهَا وَلَدَانِ لَهَا كَالْفَهْدَيْنِ يَلْعَبَانِ مِنْ تَحْتِ خَصْرِهَا بِرُمَّانَتَيْنِ فَطَلَّقَنِي وَنَكَحَهَا فَنَكَحْتُ بَعْدَهُ رَجُلًا سَرِيًّا رَكِبَ شَرِيًّا وَأَخَذَ خَطِّيًّا وَأَرَاحَ عَلَيَّ نَعَمًا ثَرِيًّا وَأَعْطَانِي مِنْ كُلِّ رَائِحَةٍ زَوْجًا وَقَالَ كُلِي أُمَّ زَرْعٍ وَمِيرِي أَهْلَكِ قَالَتْ فَلَوْ جَمَعْتُ كُلَّ شَيْءٍ أَعْطَانِيهِ مَا بَلَغَ أَصْغَرَ آنِيَةِ أَبِي زَرْعٍ قَالَتْ عَائِشَةُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كُنْتُ لَكِ كَأَبِي زَرْعٍ لِأُمِّ زَرْعٍقَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ قَالَ سَعِيدُ بْنُ سَلَمَةَ عَنْ هِشَامٍ وَلَا تُعَشِّشُ بَيْتَنَا تَعْشِيشًا قَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ وَقَالَ بَعْضُهُمْ فَأَتَقَمَّحُ بِالْمِيمِ وَهَذَا أَصَحُّ

हमसे [सुलेमान बिन अब्दुर्रहमान] अऊर [अली बिन हुज्र] दुइनौ कहिन, हमसे [ईसा बिन यूनुस] बताइन हैं [हिशम बिन उर्वाह] से [अब्दुल्ला बिन उर्वाह] से [उर्वाह] से [ऐस्याह] कहिन हैं, उ कहिन; ग्यारह मेहरारू चारों ओर बइठिन अऊर फिर एक दूसरे से वादा किहिन कि अपने पति से कौनो राज न छुपावैं। पहिली औरत कहिस, 'मोर पति पतला ऊँट मांस है, एक कठिन पहाड़ के चोटी पर है, चढ़ै मा आसान नाहीं है, अऊर मोटा नाहीं है यहै कारन ऊ आसानी से उठा सकत है'। दूसर मेहरिया कहिस- 'मोर पति? मैं उनके बारे मा कौनो अंदरूनी अऊर बाहरी बातन का प्रकट नाहीं करब। हमका डर है कि अगर हम एकर जिक्र करब तौ हम एकरा नाहीं छोड़ सकित, हम एक साथ एकर अच्छा अऊर बुरा जिक्र करब'। एक तीसरी औरत कहिस- मोर मनसवा लम्बा है। अगर हम कहित है, तौ उ हमसे तलाक दे देत है। अगर मैं चुप रहौं, तौ ऊ फोन काट देत है -मेरा काम-'। चौथी औरत कहिस, 'मोर पति है, जइसे तिहामा पर्वत के मौसम है। ई गर्म, ठंडा, डरावना अऊर उबाऊ नाहीं है'। पांचवी औरत कहिस- 'मोर पति? अगर ऊ भीतर आवत है, तौ ऊ एक शेर के बच्चा के तरह है। अगर ऊ बाहर आवत है, तौ ऊ एक शेर के समान है। उ कबो नाहीं पूछिन कि उ का जानत हैं'। छठी औरत कहिस- 'मोर पति? खात है तौ सब तरह कै खाना मिलावत है। पियत है तौ सारा पानी पी लेत है। जब सोवत है तौ कम्बल मा ढँका रहत है। उदासी जाने के लिए अपने हाथ के हथेली में नहीं घुसता -उस पर दयालु नहीं-'। सातवीं औरत कहिस- मोरे मनसवा का आपन भला नहीं पता अउर बेवकूफ है। उनके लिए सब बीमारी दवा है। उ तोहार माथा फाड़ दिहिस या तोड़ दिहिस, या तोहरे साथे दुइनौ किहिस'। आठवीं औरत कहिस, 'मोर पति खरगोश के तरह चिकना अऊर जरराब के तरह सुगंधित है - एक सुगंधित पौधा-'। नौवीं मेहरारू कहिस- 'मेरे पति कै खम्भा ऊँच है, सहायता लंबी है, धुँआ बड़ा है, आगि से घर है'। दसवीं औरत ने कहा, 'मेरे पति मालिक हैं अऊर ओनसे अच्छा कौनो मालिक नाहीं है। उनके पास बहुत ऊँट रहे अऊर उनकर चराई नजदीक रही। अगर ऊँटन मेहमानन के आवै के संकेत के रूप मा डफली के आवाज सुनत रहें, तौ ऊंटन का निश्चित लागत रहा कि ओनका वध कीन जई'। ग्यारहवीं औरत बोली- मोर पति अबू जरइन है। क्या आप जानते है कि अबू जरीन कौन है? ऊ मोर कान के गहना हिलावत रहा, मोर बांह के चर्बी भरत रहा, अऊर मोका तब तक खुश करत रहा जब तक कि मोर आत्मा खुश न होइ। ऊ मोका पहाड़न मा एक छोट बकरी के मालिक के पास पावा अऊर फिर मोका बहुत घोड़ा, बहुत ऊँट, एक खाना चक्की अऊर एक चिरई पीछा करै वाले के मालिक के पास लइ गवा। उनके जगह, मैं कहिन अऊर उनके बारे मा बुरा नाहीं बोलेन, सुबह तक सोयेन, अऊर जब तक मैं संतुष्ट नाहीं होइ गयेन तब तक पीयेन। अबू जरइन के महतारी। अबू जरइन कि मां कौन है ? खाना खाए के जगह बड़ी है अऊर घर विशाल है। अबू जरइन का बेटा। अबू जरइन का बेटा कौन था ? ओकर बिस्तर अपने म्यान से निकाली गई तलवार के तरह रहा -हल्का- अऊर ओका चार महीना के बकरी के बांह से खिलावा जात रहा। अबू जरइन के बिटिया। कौन है अबू जरइन कि बेटी ? ऊ अपने महतारी अऊर बाप के बात मानत रहा अऊर अपने पड़ोसियन का नाराज करत रहा। अबू जरइन के महिला दास। अबू जरइन कि दासी कौन थी ? ई हमरी बतियान का खराब नाहीं करत है, हमरी विरासत का हिलावत नाहीं है, अऊर हमरे घर मा घास के तरह गंदगी नाहीं भरत है। जब दूध के मटकी जोर से हिलावा जात रहा तब अबू जरइन बाहर आवा, फिर उ एक औरत से मिला जेकरे पास शेर के बच्चा के तरह दुइ शावक रहे जे दुई अनार के साथ कमर से नीचे खेलत रहे, तब अबू जरइन ने मोसे तलाक दइ दिहिस अऊर उ औरत से शादी कर लिहिस। बाद मा हम एक कुलीन मनई से शादी किहेन, तेजी से सवारी किहेन, एक भाला लिहेन, हमका पशुधन लौटायेन अऊर हर जोड़ी मा हमका एक मीठी गंध दिहेन। उन्होंने कहा कि खाओ हे उम्म जरइन और अपने परिवार का पेट भरो'। अगर मैं अपने दूसरे पति के द्वारा दिये गए सब कुछ इकट्ठा करित, तौ उ अबू जरीन के सबसे छोट बर्तन तक नाहीं पहुँचत। आयशा कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'तुम्हारे प्रति मैं उम्म जरीन के लिए अबू जरइन के समान हूँ'। अबू अब्दुल्ला कहिन; [सैद बिन सलामा] ने [हिस्याम] से कहा अऊर हमरे घर का घर के अवशेष -कचरा- से न भरौ। अबू अब्दुल्ला ने कहा, कुछ कहते हैं 'तो मैं तब तक पीया जब तक मैं तृप्त नहीं हो गया'... और ई बात ज्यादा मान्य है।

Hadith Corroboration :


Imam Bukhari : 4790
Imam Muslim : 4481