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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Bukhari : 436

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ يَحْيَى عَنْ عَمْرَةَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْأَتَتْهَا بَرِيرَةُ تَسْأَلُهَا فِي كِتَابَتِهَا فَقَالَتْ إِنْ شِئْتِ أَعْطَيْتُ أَهْلَكِ وَيَكُونُ الْوَلَاءُ لِي وَقَالَ أَهْلُهَا إِنْ شِئْتِ أَعْطَيْتِهَا مَا بَقِيَ وَقَالَ سُفْيَانُ مَرَّةً إِنْ شِئْتِ أَعْتَقْتِهَا وَيَكُونُ الْوَلَاءُ لَنَا فَلَمَّا جَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَكَّرَتْهُ ذَلِكَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ابْتَاعِيهَا فَأَعْتِقِيهَا فَإِنَّ الْوَلَاءَ لِمَنْ أَعْتَقَ ثُمَّ قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى الْمِنْبَرِ وَقَالَ سُفْيَانُ مَرَّةً فَصَعِدَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى الْمِنْبَرِ فَقَالَ مَا بَالُ أَقْوَامٍ يَشْتَرِطُونَ شُرُوطًا لَيْسَ فِي كِتَابِ اللَّهِ مَنْ اشْتَرَطَ شَرْطًا لَيْسَ فِي كِتَابِ اللَّهِ فَلَيْسَ لَهُ وَإِنْ اشْتَرَطَ مِائَةَ مَرَّةٍقَالَ عَلِيٌّ قَالَ يَحْيَى وَعَبْدُ الْوَهَّابِ عَنْ يَحْيَى عَنْ عَمْرَةَ نَحْوَهُ وَقَالَ جَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ عَنْ يَحْيَى قَالَ سَمِعْتُ عَمْرَةَ قَالَتْ سَمِعْتُ عَائِشَةَ وَرَوَاهُ مَالِكٌ عَنْ يَحْيَى عَنْ عَمْرَةَ أَنَّ بَرِيرَةَ وَلَمْ يَذْكُرْ صَعِدَ الْمِنْبَرَ

हमका बतावा गा है [अली बिन अब्दुल्ला] कहिन, हमका बतावा गा है [सुफयान] से [यह्या] से [अमरा] से [ऐस्या] कहिन, 'बरिराह उनके पास आवा अऊर खुद का आजाद करै के मामला मा मदद माँगा - एक गुलाम के रूप मा-'। आयशा तब बोली, 'अगर तुम चाहौ तौ मैं तोहरे मालिक का फिरौती देब अऊर तोहार संरक्षकता मोर है'। मालिक कहिन, 'अगर तुम चाहत हौ, तौ तुम मोका बाकी -दास के कीमत- दइ सकत हौ।' एक बार सुफियान कहिन, 'अगर तुम चाहौ तौ ओका अऊर हमरे संरक्षकता का आजाद करौ'। जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आए तो ऐसिया ने उन्हें यह बात बताई। तो पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'बेलील और आजाद हो जाओ। दरअसल, संरक्षकता उ व्यक्ति के लिए है जे ओका आजाद करत है'। तब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मंच के पास खड़े हो गए, एक बार सुफियान ने कहा, 'रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मंच पर चढ़ गए और बोले: 'कौनो लोग उन शर्तन के साथ शर्त काहे बनावत हैं जवन अल्लाह के किताब मा नाहीं हैं। जो कोई ऐसी शर्त रखता है जो अल्लाह कि किताब में नही है, वह शर्त सौ बार लगाने पर भी मान्य नही होगी'। [अली] कहिन, [यह्या] कहिन अऊर [अब्दुल वहाब] से [यह्या] से [अमरा] जइसे ई हदीस'। अऊर [जाफर बिन औन] कहिन, [यह्या] से उ कहिन, हम [अमराह] का कहत सुने रहेन, हम [ऐस्याह] का सुनेन। अऊर [मलिक] [यह्या] से [अमरा] से बयान किहिन कि बरराह....लेकिन उ इ बात का जिक्र नाहीं किहिन कि -रसूलुल्लाह- पल्पिट पर चढ़िन'।