Imam Bukhari : 4744
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ وَقَالَ اللَّيْثُ حَدَّثَنِي عُقَيْلٌ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ أَنَّهُ سَأَلَ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَاقَالَ لَهَا يَا أُمَّتَاهْ{ وَإِنْ خِفْتُمْ أَلَّا تُقْسِطُوا فِي الْيَتَامَى إِلَى قَوْلِهِ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ }قَالَتْ عَائِشَةُ يَا ابْنَ أُخْتِي هَذِهِ الْيَتِيمَةُ تَكُونُ فِي حَجْرِ وَلِيِّهَا فَيَرْغَبُ فِي جَمَالِهَا وَمَالِهَا وَيُرِيدُ أَنْ يَنْتَقِصَ مِنْ صَدَاقِهَا فَنُهُوا عَنْ نِكَاحِهِنَّ إِلَّا أَنْ يُقْسِطُوا لَهُنَّ فِي إِكْمَالِ الصَّدَاقِ وَأُمِرُوا بِنِكَاحِ مَنْ سِوَاهُنَّ مِنْ النِّسَاءِ قَالَتْ عَائِشَةُ اسْتَفْتَى النَّاسُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ ذَلِكَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ{ وَيَسْتَفْتُونَكَ فِي النِّسَاءِ إِلَى قَوْلِهِ وَتَرْغَبُونَ أَنْ تَنْكِحُوهُنَّ }فَأَنْزَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ لَهُمْ فِي هَذِهِ الْآيَةِ أَنَّ الْيَتِيمَةَ إِذَا كَانَتْ ذَاتَ مَالٍ وَجَمَالٍ رَغِبُوا فِي نِكَاحِهَا وَنَسَبِهَا وَالصَّدَاقِ وَإِذَا كَانَتْ مَرْغُوبًا عَنْهَا فِي قِلَّةِ الْمَالِ وَالْجَمَالِ تَرَكُوهَا وَأَخَذُوا غَيْرَهَا مِنْ النِّسَاءِ قَالَتْ فَكَمَا يَتْرُكُونَهَا حِينَ يَرْغَبُونَ عَنْهَا فَلَيْسَ لَهُمْ أَنْ يَنْكِحُوهَا إِذَا رَغِبُوا فِيهَا إِلَّا أَنْ يُقْسِطُوا لَهَا وَيُعْطُوهَا حَقَّهَا الْأَوْفَى مِنْ الصَّدَاقِ
हमसे कहिन [अबुल यामन] हमसे [स्युएब] [अज़ जुहरी] से कहिन हैं अऊर कहिन हैं [अल लैत्स] हमका ['उकैल] से [इब्न शिहाब] बताइन हैं [उर्वाह बिन जुबैर] से कहिन है कि उ एक बार ऐस्याह रदलियाहु अन्हा से पूछिन, उ उनसे कहिन, 'हे उम्मुन मुमिन उनकर वचन से का मतलब है, खिफ्तुम अल्ला तुकसिथु फिल यतामा।'। जब तक कि उनके शब्द, 'मा मलाकत ऐमानुकुम'।' [ऐस्याह] ने कहा, 'हे मोरे भाई के बिटिया, ई एक अनाथ लड़की से संबंधित है, जे ओकरे अभिभावक के देखभाल मा है, अऊर अभिभावक का ओकर सुंदरता अऊर धन मा रुचि है, लेकिन उ ओकर दहेज कम करै चाहत है। फिर ओनका तब तक शादी करै से मना कीन गा रहा जब तक कि उई न्याय न करिहैं अऊर दहेज पूरा न करिहैं, यहिसे ओनका दूसर औरतन से बियाह करै का आदेश दीन गा रहा'। ऐसियाह ने फिर कहा, 'ओकरे बाद, लोग रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से फतवा माँगे, फिर अल्लाह ने आयत उतार दी, 'वा यस्तफतुनाका फिन निसा'।' जब तक कि उनके शब्द, 'वा तरघाबुना अन तंकीहुहुन्ना'। तौ यहि आयत मा अल्लाह बतावत अहै कि, एक अनाथ औरत के पास धन अऊर सुंदरता होत है, उ लोग भी ओसे शादी करै चाहत हैं, ओकर वंश अऊर ओकर दहेज भी चाहत हैं। लेकिन अगर उ औरत का पसंद नाहीं करत हैं काहे से कि वहिके पास उ नाहीं है, तौ उ लोग छोड़ देत हैं अऊर दूसर औरत से शादी करत हैं।' आयशा आगे कहिन, 'जइसे जब उइ ओनका पसंद नाहीं करत रहें तौ ओनका छोड़ दिहिन, वइसे ही ओनका जब चाहें तब ओनसे शादी न करैं, सिवाय ओनके साथ न्याय करै अऊर ओनका दहेज के रूप मा पर्याप्त अधिकार देय के'।