Rasulullah shalat di atas mimbar, beliau maju untuk ruku’ dan mundur ke tanah untuk sujud
Imam Bukhari : 429
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ حَدَّثَنِي أَبُو حَازِمٍ عَنْ سَهْلٍ قَالَبَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى امْرَأَةٍ مُرِي غُلَامَكِ النَّجَّارَ يَعْمَلْ لِي أَعْوَادًا أَجْلِسُ عَلَيْهِنَّ
हमका बतावा गा है [कुतैबा बिन सईद] कहिन, हमसे बतावा गा है [अब्दुल अजीज] हमका बतावा है [अबू हाजिम] से [सहल] कहिन, 'अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) एक औरत का भेजिन अऊर कहिन, 'अपने दास बढ़ई का आदेश दे कि उ हमरे लिए एक चबूतरा बनावै, ताकि हम वहि पर बैठ सकित है'।