Imam Bukhari : 4695
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ حُمَيْدٍ عَنْ أَنَسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَأَقَامَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَ خَيْبَرَ وَالْمَدِينَةِ ثَلَاثًا يُبْنَى عَلَيْهِ بِصَفِيَّةَ بِنْتِ حُيَيٍّ فَدَعَوْتُ الْمُسْلِمِينَ إِلَى وَلِيمَتِهِ فَمَا كَانَ فِيهَا مِنْ خُبْزٍ وَلَا لَحْمٍ أُمِرَ بِالْأَنْطَاعِ فَأَلْقَى فِيهَا مِنْ التَّمْرِ وَالْأَقِطِ وَالسَّمْنِ فَكَانَتْ وَلِيمَتَهُ فَقَالَ الْمُسْلِمُونَ إِحْدَى أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ أَوْ مِمَّا مَلَكَتْ يَمِينُهُ فَقَالُوا إِنْ حَجَبَهَا فَهِيَ مِنْ أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ وَإِنْ لَمْ يَحْجُبْهَا فَهِيَ مِمَّا مَلَكَتْ يَمِينُهُ فَلَمَّا ارْتَحَلَ وَطَّى لَهَا خَلْفَهُ وَمَدَّ الْحِجَابَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ النَّاسِ
हमसे [कुतैबा] बताइस है [इस्माइल बिन जाफर] से [हुमैद] से [अनस] रदलियाल्लाहु अन्हू, उ कहिन; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खैबर अऊर मदीना के बीच के इलाका मा तीन दिन तक रहे, उ शफीया बिन्त हुयाय से शादी किहिन। यहिसे हम मुसलमानन का विलीमा मा शामिल होय का निमंत्रण दिहे रहेन। औ वलीहान मा न रोटी होत है न मांस। हुकुम दिहिन कि खाल कै एक परत बनाई जाय औ फिर वहिमा खजूर, पनीर औ सामी डारि दीन जाय। उनकर वलीम इवेंट वइसने रहा। तो मुसलमानन ने कहा कि 'वह उम्माहतिल मुस्लिमिन में से एक है या सिर्फ अपने गुलाम नौकर है'। उन्होंने कहा कि 'अगर उ हिजाब पहिरत है तो उ मुस्लिम उम्मत का हिस्सा है, लेकिन अगर उ नाहीं पहिनत है तो उ ओकर नौकर है।' यहिसे जब उ चली गइन, तौ उ ओका अपनी पीठ के पीछे नीचा रखिन, फिर उ हिजाब फैला दिहिन जवन ओका अऊर भीड़ का ढँक दिहिस।