Sesungguhnya, surat-surat yang kalian anggap Al Mufashshal itulah Al Muhkam
Imam Bukhari : 4648
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ أَخْبَرَنَا أَبُو بِشْرٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاجَمَعْتُ الْمُحْكَمَ فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ لَهُ وَمَا الْمُحْكَمُ قَالَ الْمُفَصَّلُ
हमसे कहिस है [याकूब बिन इब्राहिम] हमसे कहिस है [हुसैम] हमसे [अबू बिसिर] से [सैद बिन जुबैर] से [इब्न अब्बास] रादलियाहु अन्हू से कहिस है, उ कहिन, 'मैं रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय अल मुहकाम इकट्ठा किहे हौं'। हम उनसे ई भी पूछेन, 'अल मुहकाम का है?' उ जवाब दिहिन, 'यानी, अल मुफशशाल -छोटे अक्षर-'।