Ketentuan zakat untuk Khalid, Ibnu Jamii, dan 'Abbas
Imam Muslim : 1634
و حَدَّثَنِي زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حَفْصٍ حَدَّثَنَا وَرْقَاءُ عَنْ أَبِي الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عُمَرَ عَلَى الصَّدَقَةِ فَقِيلَ مَنَعَ ابْنُ جَمِيلٍ وَخَالِدُ بْنُ الْوَلِيدِ وَالْعَبَّاسُ عَمُّ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا يَنْقِمُ ابْنُ جَمِيلٍ إِلَّا أَنَّهُ كَانَ فَقِيرًا فَأَغْنَاهُ اللَّهُ وَأَمَّا خَالِدٌ فَإِنَّكُمْ تَظْلِمُونَ خَالِدًا قَدْ احْتَبَسَ أَدْرَاعَهُ وَأَعْتَادَهُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَأَمَّا الْعَبَّاسُ فَهِيَ عَلَيَّ وَمِثْلُهَا مَعَهَا ثُمَّ قَالَ يَا عُمَرُ أَمَا شَعَرْتَ أَنَّ عَمَّ الرَّجُلِ صِنْوُ أَبِيهِ
आ हमरा के बतवले बाड़न [जुहैर बिन हरब] हमनी के बतवले बाड़न [अली बिन हफश] हमनी के [अरका`] [अबू जिनाद] से [अल अ’राज] से [अबू हुरैरा] से बतवले बाड़न ऊ कहले बाड़न; रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर उमर के भिक्षा -जकात- इकट्ठा करे खातिर भेजले रहले। तब कहल गइल कि इब्न जमील एकरा के पूरा करे से परहेज करत रहले, जईसे कि खालिद बिन अल वलीद अवुरी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चाचा अल अब्बास भी रहले। त अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि इब्न जमील बेशुमार नईखन सिवाय एहसे कि उ गरीब आदमी हवे, एहसे अल्लाह उनुका के पर्याप्तता देस। रहल बात खालिद के त रउआ सचमुच उनुका संगे अत्याचारी व्यवहार कईले बानी, उ अल्लाह के राह में युद्ध के तैयारी में आपन कुछ ढाल रखले बाड़े। रहल बात अल अब्बास के त उनुकर दायित्व हमार बा, उनुकर बाकी दायित्व भी बा'। फेर कहलन- हे उमर, का रउरा नइखे लागत कि आदमी के चाचा अनिवार्य रूप से ओकरे बाप जइसन होला?