Imam Bukhari : 4630
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا الْمُفَضَّلُ بْنُ فَضَالَةَ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ إِذَا أَوَى إِلَى فِرَاشِهِ كُلَّ لَيْلَةٍ جَمَعَ كَفَّيْهِ ثُمَّ نَفَثَ فِيهِمَا فَقَرَأَ فِيهِمَا قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ وَ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ وَ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ثُمَّ يَمْسَحُ بِهِمَا مَا اسْتَطَاعَ مِنْ جَسَدِهِ يَبْدَأُ بِهِمَا عَلَى رَأْسِهِ وَوَجْهِهِ وَمَا أَقْبَلَ مِنْ جَسَدِهِ يَفْعَلُ ذَلِكَ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ
हमसे कहिन है [कुतैबा बिन सैद] हमसे [अल मुफदलाल बिन फदलालाह] से [उकाइल] से [इब्न शिहाब] से [उर्वाह] से [ऐस्याह] से कहिन है कि जब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हर रात बिस्तर पर जात रहें, तौ उ आपन हथेलियन का एक साथ रखत रहें, फिर ओनके ऊपर फूंकत रहें अऊर: अऊर, 'कुल `अ'उदज़ू बिराब्बिल फलाक..'। साथ ही, 'कुल `अ'उदज़ू बिरब्बिन नास।'। यहिके बाद, उ अपने शरीर के ओन हिस्सान पर दुइनौ हाथ रगड़िन जवन उनके पहुंच के भीतर रहे। ऊ सिर, चेहरा अऊर ओन हिस्सान से शुरू किहिन जहाँ तक ऊ पहुँच सकत रहा। ऊ ई बात तीन बार दोहराइस।