Tidak seorang pun dari kalian, kecuali telah ditulis tempat duduknya, neraka ataukah surga
Imam Bukhari : 4564
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَكُنَّا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي بَقِيعِ الْغَرْقَدِ فِي جَنَازَةٍ فَقَالَ مَا مِنْكُمْ مِنْ أَحَدٍ إِلَّا وَقَدْ كُتِبَ مَقْعَدُهُ مِنْ الْجَنَّةِ وَمَقْعَدُهُ مِنْ النَّارِ فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَفَلَا نَتَّكِلُ فَقَالَ اعْمَلُوا فَكُلٌّ مُيَسَّرٌ ثُمَّ قَرَأَ{ فَأَمَّا مَنْ أَعْطَى وَاتَّقَى وَصَدَّقَ بِالْحُسْنَى إِلَى قَوْلِهِ لِلْعُسْرَى }حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ حَدَّثَنَا الْأَعْمَشُ عَنْ سَعْدِ بْنِ عُبَيْدَةَ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ كُنَّا قُعُودًا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَ الْحَدِيثَ نَحْوَهُ
हमसे [अबू नुएम] हमसे [सुफयान] से [अल अमासी] से [सद बिन उबैदा] से [अबू अब्दुर्रहमान अस सुलामी] से [अली रदलियाल्लाहु अनहू] से कहिन है, उ कहिन; एक बार हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे एक अंतिम संस्कार समूह मा रहेन, ठीक बकी अल घरकाद मा, तौ उ कहिन: 'तुममें से केहू नाहीं जब तक कि ओकर आसन स्वर्ग से या नरक से लिखा न होइ'। दोस्तों ने पूछा, 'हे अल्लाह के रसूल, अगर हम बस यही पर भरोसा रखें तो का होई?' उ जवाब दिहिन: 'दान करौ, काहे से कि ई सबके लिए आसान होइ जाई'। तब उन्होंने कहा: 'फा`अम्मा मन `अ'था वात तका वा शद्दाका बिल हुसना -और जो देता है, और पुण्यवान है और भलाई को सही ठहराता है-।'। जब तक कि उनकर शब्द: 'LIL'USRAA'। हमसे कहिस है [मुसद्दाद] हमसे कहिस है [अब्दुल वाहिद] हमसे कहिस है [अल अमासी] से [सद बिन उबैदा] से [अबू अब्दुर्रहमान] से [अली रदलियाल्लाहु अन्हू] ऊ कहिस; एक बार, हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल मा बैठे रहेन। फिर उ इ तरह के एक हदीस का भी जिक्र किहिन।