Imam Bukhari : 4379
حَدَّثَنَا مُقَدَّمُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى حَدَّثَنَا عَمِّي الْقَاسِمُ بْنُ يَحْيَى عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ وَقَدْ سَمِعَ مِنْهُ عَنْ نَافِعٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاأَنَّ رَجُلًا رَمَى امْرَأَتَهُ فَانْتَفَى مِنْ وَلَدِهَا فِي زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَمَرَ بِهِمَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَتَلَاعَنَا كَمَا قَالَ اللَّهُ ثُمَّ قَضَى بِالْوَلَدِ لِلْمَرْأَةِ وَفَرَّقَ بَيْنَ الْمُتَلَاعِنَيْنِ
हमसे कहिन है [मुकद्दम बिन मुहम्मद बिन यह्या] हमसे कहिन है कि हमरे चाचा [अल कासिम बिन यह्या] [उबैदुल्लाह] से -उन्होंने उनसे सुना है- [नफी] से [इब्नू उमर रदलियाअल्लाहु अन्हुमा] से कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय, वहाँ एक आदमी रहा जे अपने पत्नी का आरोप लगावत रहा अऊर उ ई बात का नाहीं पहचानत रहा ढोवत रहा ओकर बच्चा रहा। तौ पैगम्बर ने दुइनौ का एक दूसरे के सामना करै का आदेश दिहिन लेकिन दुइनौ एक दूसरे पर आरोप लगाइन। जइसे कि अल्लाह कहत हैं, अल्लाह के रसूल ने फैसला किहिन कि उनकर बच्चा उनकर पत्नी का है अऊर ओन दुइनौ का अलग कइ दिहिन, -पति अऊर पत्नी-।