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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Kisah perjalanan Nabi Musa 'alaihissalam menuntut ilmu dan pertemuannya dengan Nabi Khidhir 'alaihissalam

Imam Bukhari : 6924

حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو حَفْصٍ عَمْرٌو حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ حَدَّثَنِي ابْنُ شِهَابٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا أَنَّهُ تَمَارَى هُوَ وَالْحُرُّ بْنُ قَيْسِ بْنِ حِصْنٍ الْفَزَارِيُّ فِي صَاحِبِ مُوسَى أَهُوَ خَضِرٌ فَمَرَّ بِهِمَا أُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ الْأَنْصَارِيُّ فَدَعَاهُ ابْنُ عَبَّاسٍ فَقَالَ إِنِّي تَمَارَيْتُ أَنَا وَصَاحِبِي هَذَا فِي صَاحِبِ مُوسَى الَّذِي سَأَلَ السَّبِيلَ إِلَى لُقِيِّهِ هَلْ سَمِعْتَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَذْكُرُ شَأْنَهُ قَالَ نَعَمْ إِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ بَيْنَا مُوسَى فِي مَلَإٍ مِنْ بَنِي إِسْرَائِيلَ إِذْ جَاءَهُ رَجُلٌ فَقَالَ هَلْ تَعْلَمُ أَحَدًا أَعْلَمَ مِنْكَ فَقَالَ مُوسَى لَا فَأُوحِيَ إِلَى مُوسَى بَلَى عَبْدُنَا خَضِرٌ فَسَأَلَ مُوسَى السَّبِيلَ إِلَى لُقِيِّهِ فَجَعَلَ اللَّهُ لَهُ الْحُوتَ آيَةً وَقِيلَ لَهُ إِذَا فَقَدْتَ الْحُوتَ فَارْجِعْ فَإِنَّكَ سَتَلْقَاهُ فَكَانَ مُوسَى يَتْبَعُ أَثَرَ الْحُوتِ فِي الْبَحْرِ فَقَالَ فَتَى مُوسَى لِمُوسَى { أَرَأَيْتَ إِذْ أَوَيْنَا إِلَى الصَّخْرَةِ فَإِنِّي نَسِيتُ الْحُوتَ وَمَا أَنْسَانِيهِ إِلَّا الشَّيْطَانُ أَنْ أَذْكُرَهُ } قَالَ مُوسَى { ذَلِكَ مَا كُنَّا نَبْغِي فَارْتَدَّا عَلَى آثَارِهِمَا قَصَصًا } فَوَجَدَا خَضِرًا وَكَانَ مِنْ شَأْنِهِمَا مَا قَصَّ اللَّهُ

हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन मुहम्मद] हमसे कहिन है [अबू हफस अमरू] हमसे कहिन है [अल औजाई] ने हमसे [इब्न शिहाब] से [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] से [इब्न अब्बास] रादलियाल्लाहू अन्हुमा से कहा है, कि उ एक बार अल बिन हुर अल कारी के साथ फिजारी के बारे में मूसा के साथी, का उ सचमुच खिदर रहे? फिर [उब्बे बिन का'ब अल अंसारी] दुइनौ का पास किहिन। इब्न अब्बास ने तब ओनका बोलावा अऊर कहिन, 'मैं अपने दोस्त से मूसा के दोस्त के बारे मा बहस करत रहेंव जेसे मूसा उनसे मिले का कहिन, का आपने रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का उनकर जिक्र सुना? ' उब्बे ने जवाब दिया, 'ठीक है, हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहते सुने रहेन: 'जब मूसा इजरायल के बच्चन के सभा मा रहे, त अचानक उनके पास केहू आवा, अऊर उ व्यक्ति पूछिस 'का तुम एक सेवक का जानत हौ जे तुमसे ज्यादा धर्मनिष्ठ है! ' मूसा ने जवाब दिया, 'नहीं', तब मूसा को एक रहस्योद्घाटन मिला जिसमें एक आवाज सुनाई दी, 'हाँ, खिड़लीर नामक मेरा एक सेवक है'। तब मूसा ने अपने साथ देखे के लिए कहा, अऊर अल्लाह ने उ मछरी का एक निशानी के रूप मा बनावा, फिर उ मूसा से कहिन, 'अगर आप जवन मछरी प्रदान किहिन है उ खो देत हैं, तौ उ जगह लौट जा जहाँ उ गायब होइ गै रही, आप ओका जरूर पा लेब'। त मूसा ने समुद्र मा अपनी मछरी के निशान का पता लगावा, फिर मूसा के साथे रहे वाले जवान आदमी मूसा से कहिन '-का तोहका याद नाहीं है कि जब हम चट्टान मा शरण लिहे रहेन, वास्तव मा हम मछरी के बारे मा भूल गयेन, अऊर शैतान के अलावा हमका कुछौ नाहीं भूलवाइस-' -प्रश्न। अल कहफ: 63-, फिर मूसा कहिन '-वही जगह हम खोजत रहेन, एहसे उ दुइनौ आपन मूल कदमन का पता लगावै खातिर लौटि आए-' -क्यूएस। अल कहफी: 63-, फिर दुइनौ जने खिदिर का पावा, जे अंत मा दुइनौ आपन कहानी वइसने सुनाइन जइसे अल्लाह बताइन'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 20192, 20197, 20200, 20209
Imam Bukhari : 72, 76, 119, 3148, 3149, 6924
Imam Muslim : 4385, 4386, 4388
Imam Tirmidzi : 3074