Doa Nabi yang disimpan untuk Syafaat umat
Imam Bukhari : 6920
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ حَدَّثَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِكُلِّ نَبِيٍّ دَعْوَةٌ فَأُرِيدُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ أَنْ أَخْتَبِيَ دَعْوَتِي شَفَاعَةً لِأُمَّتِي يَوْمَ الْقِيَامَةِ
हमसे कहा गा है [अबुल यामन] हमसे [स्युएब] से [अज़ुहरी] बताइस है [अबू सलामा बिन अब्दुर्रहमान], कि [अबू हुरैराह] कहिन, 'अल्लाह के रसूल (अल्लाह के शांति अऊर बरकत) कहिन: 'हर नबी के पास एक प्रार्थना है जेका जवाब दीन गा है, जबकि मैं अपनी प्रार्थना का जवाब जारी रखब, जइसे कि भगवान, न्याय के दिन अपने लोगन के लिए मध्यस्थता करब।'