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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Bukhari : 4277

حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ{ خُذْ الْعَفْوَ وَأْمُرْ بِالْعُرْفِ }قَالَ مَا أَنْزَلَ اللَّهُ إِلَّا فِي أَخْلَاقِ النَّاسِ وَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بَرَّادٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الزُّبَيْرِ قَالَأَمَرَ اللَّهُ نَبِيَّهُ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَأْخُذَ الْعَفْوَ مِنْ أَخْلَاقِ النَّاسِ أَوْ كَمَا قَالَ

हमसे [यह्या] ने हमसे [वाकी'] से [हिस्याम] से [अपने पिता] से [अब्दुल्लाह बिन अज़ जुबैर] से अल्लाह के वचन के बारे में कहा है; क्षमा करै वाला बनौ अऊर लोगन का म'रुफ करै का आदेश दें -अल अ'रफ: 199-। ऊ कहत है; अल्लाह ने मानव नैतिकता के अलावा ई प्रकट नाहीं किहिन। [अब्दुल्ला बिन बर्राद] कहिन; हमसे कहिन है [अबू उसामा] हमसे [हिस्याम] से [अपने पिता] से [अब्दुल्लाह बिन अज जुबैर] से कहिन है; 'अल्लाह ने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा कि उनके प्रति मानवीय गलती माफ करौ'। -या कम या ज्यादा उहै कहिन।-