Kaum Haruriyah dan Khawarij membaca Al-Qur'an dan tidak mencapai kerongkongan, mereka meninggalkan agama dengan cepatnya seperti terlepasnya anak panah dari panah
Imam Bukhari : 3990
حَدَّثَنَا قَبِيصَةُ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ لَمَّا قَسَمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قِسْمَةَ حُنَيْنٍ قَالَ رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ مَا أَرَادَ بِهَا وَجْهَ اللَّهِ فَأَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرْتُهُ فَتَغَيَّرَ وَجْهُهُ ثُمَّ قَالَ رَحْمَةُ اللَّهِ عَلَى مُوسَى لَقَدْ أُوذِيَ بِأَكْثَرَ مِنْ هَذَا فَصَبَرَ
हमसे कहिन है [काबीशाह] हमका [सुफयान] से [अल अमासी] से [अबू वैल] से [अब्दुल्ला] से कहिन है, उ कहिन, जब पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने हुनैन के लूट का विभाजन किहिन, तौ एक अंसार पैगम्बर के नीति पर टिप्पणी करत रहा; 'ई एक अइसन विभाजन है जेकर उद्देश्य अल्लाह के चेहरा खोजब नाहीं है'। त हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास गयेन अऊर ओनके पास ई 'आलोचना' पहुँचाइन। तुरंत उनकर चेहरा बदल गवा अऊर उ कहिन: 'अल्लाह के रहम हमेशा मूसा पर रहे, जेका ईसे ज्यादा चोट आई, लेकिन उ धीरज रखिन'।