इमाम बुखारी : 3870
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ هِشَامٍ أَبُو عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ عَنْ أَبِي بِشْرٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْحُدَيْبِيَةِ وَنَحْنُ مُحْرِمُونَ وَقَدْ حَصَرَنَا الْمُشْرِكُونَ قَالَ وَكَانَتْ لِي وَفْرَةٌ فَجَعَلَتْ الْهَوَامُّ تَسَّاقَطُ عَلَى وَجْهِي فَمَرَّ بِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَيُؤْذِيكَ هَوَامُّ رَأْسِكَ قُلْتُ نَعَمْ قَالَ وَأُنْزِلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ { فَمَنْ كَانَ مِنْكُمْ مَرِيضًا أَوْ بِهِ أَذًى مِنْ رَأْسِهِ فَفِدْيَةٌ مِنْ صِيَامٍ أَوْ صَدَقَةٍ أَوْ نُسُكٍ }
मुझे बताया है [मुहम्मद बिन हिशाम अबू अब्दुल्लाह] ने हमें बताया है [हुसैयम] [अबू बिसयर] से [मुजाहिद] से [इब्न अबू लैला] से [कअब बिन उजरा रदलिल्लाहु अन्हु] उन्होंने कहा; "हम हुदैबियाह समझौते के समय रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ थे, उस समय हम एहराम में थे जबकि मुस्यतिकिन ने हमें (मंदिर से) रोक दिया था। उन्होंने कहा; "उस समय मैं इतना बीमार था कि मेरे चेहरे पर जूँ पड़ गईं। जब पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मेरे सामने से गुजरे, तो उन्होंने पूछा: "क्या आपके सिर पर जूँ वास्तव में आपको परेशान करती हैं?" मैंने उत्तर दिया; "सही"। वह कहते हैं; "इसके बाद यह आयत आई: "...तो तुममें से जो कोई बीमार हो या उसके सिर में कोई बीमारी हो (और फिर मुंडवा ले), उसे रोज़ा रखना चाहिए या सदका देना चाहिए या कुर्बानी देनी चाहिए।" QS अल बक़रा; 196.