Imam Bukhari : 3628
حَدَّثَنَا أَصْبَغُ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ عَنْ يُونُسَ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ أَبَا بَكْرٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ تَزَوَّجَ امْرَأَةً مِنْ كَلْبٍ يُقَالُ لَهَا أُمُّ بَكْرٍ فَلَمَّا هَاجَرَ أَبُو بَكْرٍ طَلَّقَهَا فَتَزَوَّجَهَا ابْنُ عَمِّهَا هَذَا الشَّاعِرُ الَّذِي قَالَ هَذِهِ الْقَصِيدَةَ رَثَى كُفَّارَ قُرَيْشٍ وَمَاذَا بِالْقَلِيبِ قَلِيبِ بَدْرٍ مِنْ الشِّيزَى تُزَيَّنُ بِالسَّنَامِ وَمَاذَا بِالْقَلِيبِ قَلِيبِ بَدْرٍ مِنْ الْقَيْنَاتِ وَالشَّرْبِ الْكِرَامِ تُحَيِّينَا السَّلَامَةَ أُمُّ بَكْرٍ وَهَلْ لِي بَعْدَ قَوْمِي مِنْ سَلَامِ يُحَدِّثُنَا الرَّسُولُ بِأَنْ سَنَحْيَا وَكَيْفَ حَيَاةُ أَصْدَاءٍ وَهَامِ
हमका बतावा गा है [अशबाग] हमका [इब्नू वाहब] से [यूनुस] से [इब्न शिहाब] से [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] से [ऐस्याह] रदलियाल्लाहु अन्हा से कहिन है कि अबू बकर रदलियाहु अन्हू ने एक बार कालिब जनजाति के एक औरत से शादी किहिन जेका बाद मा उम्म बक कहा जात रहा। फिर अबू बकर जब उ प्रवास किहिन तौ ओसे तलाक ले लिहिन। तब औरत के शादी ओकरे चचेरे भाई के बेटवा से भै, एक कवि जे कुरैश काफिरन के तारीफ करत कविता गावत रहे - जे बदर के लड़ाई मा मारा गा रहे; 'बदर के कुँआ मा का बा? उई लोग हैं जिनके पास ऊँट के कूबड़ के मांस से सजाए गए शिजा पेड़ से लकड़ी के कटोरे हैं। बदर के कुँआ मा का बा? अर्थात् गुलाम औरत अऊर पीवै वाले लोग, आपकी महामहिम। उम्म बकर -हमरे- सुरक्षित रहै के लिए प्रार्थना करत हैं। का मोर लोगन के चले जाय के बाद मोर बरे सुरक्षित है? प्रेरित हमसे कहिन कि हम फिर से जिन्दा रहब। अश्दा' -उल्लू- अऊर हैम -खोपड़ी-सिर वाले पक्षी फिर से कैसे जीवित होइ सकत हैं?'।