Rasulullah shalat menghadap ke baitul maqdis bersama para sahabatnya selama enam belas bulan, kemudian terjadi peralihan arah kiblat ke ka’bah setelah itu
Imam Bukhari : 384
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ رَجَاءٍ قَالَ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَلَّى نَحْوَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ سِتَّةَ عَشَرَ أَوْ سَبْعَةَ عَشَرَ شَهْرًا وَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُحِبُّ أَنْ يُوَجَّهَ إِلَى الْكَعْبَةِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ{ قَدْ نَرَى تَقَلُّبَ وَجْهِكَ فِي السَّمَاءِ }فَتَوَجَّهَ نَحْوَ الْكَعْبَةِ وَقَالَ السُّفَهَاءُ مِنْ النَّاسِ وَهُمْ الْيَهُودُ{ مَا وَلَّاهُمْ عَنْ قِبْلَتِهِمْ الَّتِي كَانُوا عَلَيْهَا قُلْ لِلَّهِ الْمَشْرِقُ وَالْمَغْرِبُ يَهْدِي مَنْ يَشَاءُ إِلَى صِرَاطٍ مُسْتَقِيمٍ }فَصَلَّى مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلٌ ثُمَّ خَرَجَ بَعْدَ مَا صَلَّى فَمَرَّ عَلَى قَوْمٍ مِنْ الْأَنْصَارِ فِي صَلَاةِ الْعَصْرِ نَحْوَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ فَقَالَ هُوَ يَشْهَدُ أَنَّهُ صَلَّى مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَّهُ تَوَجَّهَ نَحْوَ الْكَعْبَةِ فَتَحَرَّفَ الْقَوْمُ حَتَّى تَوَجَّهُوا نَحْوَ الْكَعْبَةِ
का ई हमसे [अब्दुल्लाह बिन राजा'] कहिस, का ई हमका [इजरायल] से [अबू इशाक] से [अल बारा' बिन अजीब से कहिस है? रदलियाहु अन्हुमा] कहिन, 'रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सोलह या सत्रह महीना तक बैतुल मकदीस के सामने नमाज पढ़िन, अऊर रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैही वसल्लम चाहत रहें कि किबला काबा के ओर मुड़ जाय। त अल्लाह ने ई आयत का प्रकट किहिन: -'वास्तव मा, हम -अक्सर- तोहार चेहरा आकाश के ओर देखत देखित है-' -प्रश्न। अल बकराह: 144-। तौ फिर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम काबा का सामना किहिन। तब समझदारी के कमी वाले लोग, अर्थात् यहूदी लोग कहिन: '-उनका - मुसलमानन का - उनके किबला - बैतुल मकदीस से - जेकरे पास उ पहिले मुँह किहिन रहैं, का दूर कइ दिहिस?' कहौ: 'पूरब अऊर पश्चिम अल्लाह के अहै। उ जेका चाहे ओका सीधा रास्ता पर ले जात है- ' -अस। अल बकराह: 144-। फिर एक अइसन मनई रहा जे पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे नमाज पढ़ै मा शामिल भवा रहा, उ मनई तब आपन नमाज खतम कइके चला गा रहा। फिर उ व्यक्ति अंसार के पास से गुजरा जवन बैतुल मकदीस के ओर मुँह कइके असर नमाज पढ़त रहें। फिर उ व्यक्ति गवाही दिहिस कि उ रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के साथे काबा के ओर मुँह कइके नमाज पढ़े रहा। तौ लोग मुड़ के काबा का सामना किहिन'।