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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Bukhari : 3554

حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ حَدَّثَنِي أَخِي عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بِلَالٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ كَانَ لِأَبِي بَكْرٍ غُلَامٌ يُخْرِجُ لَهُ الْخَرَاجَ وَكَانَ أَبُو بَكْرٍ يَأْكُلُ مِنْ خَرَاجِهِ فَجَاءَ يَوْمًا بِشَيْءٍ فَأَكَلَ مِنْهُ أَبُو بَكْرٍ فَقَالَ لَهُ الْغُلَامُ أَتَدْرِي مَا هَذَا فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ وَمَا هُوَ قَالَ كُنْتُ تَكَهَّنْتُ لِإِنْسَانٍ فِي الْجَاهِلِيَّةِ وَمَا أُحْسِنُ الْكِهَانَةَ إِلَّا أَنِّي خَدَعْتُهُ فَلَقِيَنِي فَأَعْطَانِي بِذَلِكَ فَهَذَا الَّذِي أَكَلْتَ مِنْهُ فَأَدْخَلَ أَبُو بَكْرٍ يَدَهُ فَقَاءَ كُلَّ شَيْءٍ فِي بَطْنِهِ

हमसे कहिन है [इस्माइल] ने हमसे [मेरे भाई] से [सुलेमान बिन बिलाल] से [यह्या बिन सैद] से [अब्दुर्रहमान बिन अल कासिम] से [अल कासिम बिन मुहम्मद] से [ऐस्याह] रदलियाहु अन्हा ने कहा है; 'पहिले अबू बकर के पास एक सहायक रहा जेकर काम उनके लिए कर वसूलब रहा। अबू बकर एक बार कर का हिस्सा खा लिहिन। एक दिन उनकर नौकर खाना लइके आवा, तौ अबू बकर ओका खा लिहिन। तो सेवक ने अबू बकर से कहा; 'का तुम जानत हौ कि तुम का खाए रहेव?'. अबू बकर ने पूछा; 'वह का है?'. ओकर नौकर कहिस; 'अतीत मा, जाहिलिया युग मा, मैं एक अइसन मनई रहेंव जे केहू के लिए भाग्य बतावत रहेंव - एक शमन के रूप मा - अऊर जब तक मैं ओका धोखा नाहीं देत रहेंव, तब तक मैं शमनवाद मा माहिर नाहीं रहेंव, तब उ मनई मोर पास आवत रहा अऊर मोका कुछ देत रहा। ई वही परिणाम है जवन तुम पहिले खाये रहेव'। यहिसे अबू बकर आपन उंगली अपने मुँह मा डारिन अऊर पेट मा जवन कुछ रहा उ सब उल्टी कइ दिहिन।