Imam Bukhari : 3401
حَدَّثَنِي الْوَلِيدُ بْنُ صَالِحٍ حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ سَعِيدِ بْنِ أَبِي الْحُسَيْنِ الْمَكِّيُّ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ إِنِّي لَوَاقِفٌ فِي قَوْمٍ فَدَعَوْا اللَّهَ لِعُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ وَقَدْ وُضِعَ عَلَى سَرِيرِهِ إِذَا رَجُلٌ مِنْ خَلْفِي قَدْ وَضَعَ مِرْفَقَهُ عَلَى مَنْكِبِي يَقُولُ رَحِمَكَ اللَّهُ إِنْ كُنْتُ لَأَرْجُو أَنْ يَجْعَلَكَ اللَّهُ مَعَ صَاحِبَيْكَ لِأَنِّي كَثِيرًا مَا كُنْتُ أَسْمَعُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ كُنْتُ وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَفَعَلْتُ وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَانْطَلَقْتُ وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ فَإِنْ كُنْتُ لَأَرْجُو أَنْ يَجْعَلَكَ اللَّهُ مَعَهُمَا فَالْتَفَتُّ فَإِذَا هُوَ عَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ
हमका बतावा है [अल वालिद बिन शालिह] हमसे कहिस है ['ईसा बिन यूनुस] हमसे [उमर बिन सईद बिन अबू अल हुसैन अल मक्की] से [इब्नू अबू अवलका] से [इब्नू अब्बास रदलियाल्लाहु अन्हुमा] कहिस है; 'जब मैं मुसलमानन के बीच रहा, तौ पता चला कि उ उमर बिन अल क्थथथब के लिए प्रार्थना करत रहे, जब ओनके शरीर का ओनके बिस्तर पर रखा गा रहा, त अचानक मोर पीछे से एक आदमी आवा रहा जे मोर कंधा पर आपन कोहनी रखिस अऊर कहिस; 'अल्लाह आप पर रहम करे। मैं सचमुच आशा करत हउँ कि अल्लाह तुमका अपने दुइनौ दोस्तन - अबू बकर अऊर उमर - के साथे बनाइहैं काहे से कि मैं अक्सर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का कहत सुनत रहौं: 'मैं अबू बकर अऊर उमर के साथ हौं।' हम, अबू बकर अऊर उमर कुछ करत रहेन अऊर हम, अबू बकर अऊर उमर -यात्रा-' मा चले गयेन। त, हम सचमुच आशा करत हई कि अल्लाह तुम दुइनौ का -अंतिम संस्कार मा- बनाई। फिर हम मुड़ेन, पता चला कि ऊ मनई [अली बिन अबू तालिब] रहा'।