Imam Bukhari : 3319
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ أَيْمَنَ قَالَ سَمِعْتُ أَبِي عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَقُومُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ إِلَى شَجَرَةٍ أَوْ نَخْلَةٍ فَقَالَتْ امْرَأَةٌ مِنْ الْأَنْصَارِ أَوْ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلَا نَجْعَلُ لَكَ مِنْبَرًا قَالَ إِنْ شِئْتُمْ فَجَعَلُوا لَهُ مِنْبَرًا فَلَمَّا كَانَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ دُفِعَ إِلَى الْمِنْبَرِ فَصَاحَتْ النَّخْلَةُ صِيَاحَ الصَّبِيِّ ثُمَّ نَزَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَضَمَّهُ إِلَيْهِ تَئِنُّ أَنِينَ الصَّبِيِّ الَّذِي يُسَكَّنُ قَالَ كَانَتْ تَبْكِي عَلَى مَا كَانَتْ تَسْمَعُ مِنْ الذِّكْرِ عِنْدَهَا
हमसे कहिन [अबू नुएम] हमसे कहिन हैं [अब्दुल वाहिद बिन अयमन] कहिन, हम [जाबिर बिन अब्दुल्लाह रदलियाअल्लाहु अन्हू] से [अपने पिता] का सुने रहेन कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बार एक शुक्रवार का दिन एक पेड़ या खजूर पर खड़ा रहे अऊर वहाँ एक औरत या अंसार से एक आदमी रहा जे कहिस; हे अल्लाह के रसूल, 'हम आपके लिए एक पल्पिट बना दे तो कैसा लगे? '. उ जवाब दिहिन; 'आगे बढ़ौ, अगर तुम चाहत हौ'। यहिसे उइ ओका एक पल्पिट बनाइन। शुक्रवार का ऊ पल्पिट पर चढ़ा अऊर खजूर के पेड़ एक बच्चा के तरह चिल्लाया। तौ फिर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पेड़ के तने के पास उतरे अऊर ओका गले लगा लिहिन ताकि ओकर चीख कमजोर होइ गै जब तक कि ई एक बच्चा के कराह के तरह न होइ गवा जवन आखिरकार अपने आप शांत होइ गवा। उ कहिन: 'लॉग रोया काहे से कि उ अपने चारों ओर ज़िकर सुनिस'।