Rasulullah shallallahu 'alaihi wasallam melarang ad dubbaa`, al hantam, al muzaffaat dan an naqir
Imam Nasa'i : 5597
أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَتَّابٍ وَهُوَ سَهْلُ بْنُ حَمَّادٍ قَالَ حَدَّثَنَا قُرَّةُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو جَمْرَةَ نَصْرٌ قَالَ قُلْتُ لِابْنِ عَبَّاسٍ إِنَّ جَدَّةً لِي تَنْبِذُ نَبِيذًا فِي جَرٍّ أَشْرَبُهُ حُلْوًا إِنْ أَكْثَرْتُ مِنْهُ فَجَالَسْتُ الْقَوْمَ خَشِيتُ أَنْ أَفْتَضِحَ فَقَالَ قَدِمَ وَفْدُ عَبْدِ الْقَيْسِ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مَرْحَبًا بِالْوَفْدِ لَيْسَ بِالْخَزَايَا وَلَا النَّادِمِينَ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ الْمُشْرِكِينَ وَإِنَّا لَا نَصِلُ إِلَيْكَ إِلَّا فِي أَشْهُرِ الْحُرُمِ فَحَدِّثْنَا بِأَمْرٍ إِنْ عَمِلْنَا بِهِ دَخَلْنَا الْجَنَّةَ وَنَدْعُو بِهِ مَنْ وَرَاءَنَا قَالَ آمُرُكُمْ بِثَلَاثٍ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ آمُرُكُمْ بِالْإِيمَانِ بِاللَّهِ وَهَلْ تَدْرُونَ مَا الْإِيمَانُ بِاللَّهِ قَالُوا اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ شَهَادَةُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَإِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَأَنْ تُعْطُوا مِنْ الْمَغَانِمِ الْخُمُسَ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ عَمَّا يُنْبَذُ فِي الدُّبَّاءِ وَالنَّقِيرِ وَالْحَنْتَمِ وَالْمُزَفَّتِ
हमका [अबू दाऊद] सूचित कइके उ कहिन; हमसे [अबू अत्ताब] - अर्थात् सहल बिन हम्माद - बताइन हैं - उ कहिन; हमसे [कुर्रा] सुनाइन है, उ कहिन; हमसे कहिन है [अबू जमराह नशर] उ कहिन, 'मैंने एक बार [इब्न अब्बास] से कहा, 'मेरी दादी ने एक माटी के बर्तन मा नबीदज़ का रस बनावा, फिर मैंने ओका मीठा पिया। अगर मैं बहुत ज्यादा पीत हउँ, तौ मैं लोगन के साथे घूमत हउँ - इधर-उधर बैठत हउँ - ताकि नशा मा न दिखै। इब्न अब्बास तब कहिन, 'अबू कैस से एक दूत रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के पास आवा अहै, तब उ ओनका ई कहिके अभिवादन किहिन: 'दूतन का स्वागत है, जे घृणित अऊर पछतावा करै वाले लोगन मा से नाहीं हैं'। उन्होंने कहा कि हे अल्लाह के रसूल हमरे और आपके बीच मूर्तिपूजक हैं और हम आपसे हराम महीनों के अलावा नहीं मिल सकत हैं। तौ हमका एक हुकुम दइ द्या, अगर हम यहिका निभाइब तौ हम स्वर्ग मा घुसब, अऊर हम यहिका अपने बाद के लोगन तक पहुँचा सकित है'। उ कहिन: 'मैं तोहका तीन चीजन के आज्ञा देत हउँ अऊर चार चीजन से मना करत हउँ। मैं तोहका अल्लाह पर भरोसा रखै का हुकुम देत हउँ। का तुम जानत हौ कि अल्लाह पर बिस्वास का होत है?' उइ जवाब दिहिन, 'अल्लाह अऊर उनके रसूल बेहतर जानत हैं'। उ कहिन: 'गवाही दइ द्या कि अल्लाह के अलावा पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है, नमाज स्थापित करा, जकात अदा करा अऊर घनिमा के आय का पांचवां हिस्सा दइ द्या। अऊर हम तोहका चार चीजन से मना करत हई; अद दुबा, अन नकिर, अल हंतम अऊर अल मुजफत मा पैगम्बर के भावना बनाइन।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 600, 917, 1119, 2347, 2369, 2518, 2635, 2923, 3000, 3130, 4235, 4346, 4773, 4973, 5237, 5420, 6987, 7425, 8986, 10253, 10548, 10568, 11119, 11420, 11421, 11422, 11628, 13749, 14314, 14529, 16193, 16205, 17185, 17187, 17189, 19720, 19724, 23070, 23367, 23530, 23670, 23696, 23775, 23862, 24221, 24228, 24489, 24878, 25451, 25595
Imam Bukhari : 51, 85, 492, 1311, 2864, 3233, 3248, 4021, 5159, 5165, 5166, 6724, 7001
Imam Muslim : 23, 24, 25, 26, 3688, 3689, 3690, 3691, 3692, 3693, 3694, 3695, 3696, 3697, 3698, 3699, 3700, 3701, 3702, 3703, 3704, 3705, 3706, 3707
Imam Abu Dawud : 3205, 3206, 3207, 3208, 3209, 3210, 3211
Imam Tirmidzi : 1791, 2536
Imam Nasa'i : 4945, 5079, 5080, 5453, 5454, 5455, 5456, 5457, 5458, 5459, 5460, 5461, 5462, 5495, 5496, 5518, 5529, 5530, 5531, 5532, 5533, 5534, 5535, 5536, 5537, 5538, 5539, 5540, 5543, 5545, 5546, 5547, 5548, 5549, 5550, 5551, 5552, 5553, 5554, 5555, 5583, 5586, 5597
Imam Ibnu Majah : 3392, 3393, 3394, 3395
Imam Malik : 1328, 1329, 1330
Imam Darimi : 2018, 2019, 2020