Imam Bukhari : 4242
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سُلَيْمَانَ قَالَ حَدَّثَنِي ابْنُ وَهْبٍ قَالَ أَخْبَرَنِي عَمْرٌو أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ الْقَاسِمِ حَدَّثَهُ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَاسَقَطَتْ قِلَادَةٌ لِي بِالْبَيْدَاءِ وَنَحْنُ دَاخِلُونَ الْمَدِينَةَ فَأَنَاخَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَنَزَلَ فَثَنَى رَأْسَهُ فِي حَجْرِي رَاقِدًا أَقْبَلَ أَبُو بَكْرٍ فَلَكَزَنِي لَكْزَةً شَدِيدَةً وَقَالَ حَبَسْتِ النَّاسَ فِي قِلَادَةٍ فَبِي الْمَوْتُ لِمَكَانِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَدْ أَوْجَعَنِي ثُمَّ إِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَيْقَظَ وَحَضَرَتْ الصُّبْحُ فَالْتُمِسَ الْمَاءُ فَلَمْ يُوجَدْ فَنَزَلَتْ{ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قُمْتُمْ إِلَى الصَّلَاةِ }الْآيَةَ فَقَالَ أُسَيْدُ بْنُ حُضَيْرٍ لَقَدْ بَارَكَ اللَّهُ لِلنَّاسِ فِيكُمْ يَا آلَ أَبِي بَكْرٍ مَا أَنْتُمْ إِلَّا بَرَكَةٌ لَهُمْ
हमसे [यह्या बिन सुलेमान] कहिन है, उ कहिन; मोका [इब्न वाहब] बताय के बाद उ कहिन; हमसे [अमरू] बताये रहे कि ['अब्दुर रहमान बिन अल कासिम] ने [अपने पिता] से [ऐस्या रदलियाह अन्हा] से बताये रहे, हमार हार बैदा मा खो गा रहा, उ समय हम मदीना शहर मा घुसे रहेन, एहसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम आपन ऊँट का रोकिन अऊर उतरि गें। फिर लेटत समय गोदी मा आपन माथा टिका लिहिन। अबू बकर गुस्सा मा मोर आलोचना करत मोर पास आए, उ कहिन; 'तुम लोगन का आपन सफर जारी रखै से रोक दिहे हौ काहे से कि उई हार ढूंढत रहें।' मैं एक मृत व्यक्ति के तरह चुप रहा, रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम का परेशान करै के डर से, भले ही अबू बकर मोका चोट पहुँचाये रहे। फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम नींद से उठिन अऊर सुबह के नमाज का समय होइ गवा रहा, तौ उ पानी ढूँढिन, लेकिन पानी नाहीं मिला। तब यह श्लोक उतरा: हे इमानवान जब नमाज करना चाहते हो... -अल मैदाह: 6-। तौ उसैद बिन हुडलेयर कहिन; 'वास्तव में अल्लाह ने आपके कारण लोगन का बरकत दिहिस है, हे अबू बकर के परिवार। जब तक आप ओनका आशीर्वाद नाहीं दिहिन तब तक आप वहाँ नाहीं हई।