Ayat yang dianggap yahudi layak jadi hari raya jika diturunkan kepada mereka (Qs. Al-Ma'idah: 3)
Imam Bukhari : 4240
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ قَيْسٍ عَنْ طَارِقِ بْنِ شِهَابٍقَالَتْ الْيَهُودُ لِعُمَرَ إِنَّكُمْ تَقْرَءُونَ آيَةً لَوْ نَزَلَتْ فِينَا لَاتَّخَذْنَاهَا عِيدًا فَقَالَ عُمَرُ إِنِّي لَأَعْلَمُ حَيْثُ أُنْزِلَتْ وَأَيْنَ أُنْزِلَتْ وَأَيْنَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ أُنْزِلَتْ يَوْمَ عَرَفَةَ وَإِنَّا وَاللَّهِ بِعَرَفَةَ قَالَ سُفْيَانُ وَأَشُكُّ كَانَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ أَمْ لَا{ الْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ }
हमका [मुहम्मद बिन बसिसियार] बताइस है [अब्दुर रहमान] हमसे [सुफयान] का [कैस] से [थारिक बिन शिहाब] से कहिस है; यहूदी लोग उमर से कहिन; 'सचमुच, अगर तुम एक श्लोक पढ़त हौ, अगर उ श्लोक हमरे ऊपर प्रकट होइ जात, तौ जेहि दिन ऊ छंद प्रकट होत, निश्चित तौर पर छुट्टी बनावा जात'। तब [उमर] ने जवाब दिया; 'वास्तव मा, मैं सचमुच जानत हउँ कि आयत कहाँ से उतरी, किस दिन उतरी, अऊर रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहाँ रहे जब उ आयात उतारी, कि उ आयात अराफा के दिन उतरी अऊर हम, उ समय अल्लाह के द्वारा, अराफा पर वुकुफ करत रहेन'। सुफयान कहिन; मोका संदेह है; 'शुक्रवार होय या न होय'। अर्थात् छंद; 'आज हम तोहरे बरे तोहरे धर्म का सिद्ध किहे हई, अऊर तोहरे ऊपर आपन आशीर्वाद पूरा किहे हई, अऊर इस्लाम का तोहरे बरे धर्म के रूप मा मंजूरी दिहे हई'।-QS अल मैदा श्लोक: 3-।